भारत के दूसरे चंद्र मिशन ‘चंद्रयान-2’ से संबंधित एक अति महत्वपूर्ण घटनाक्रम में सोमवार को इसके ‘विक्रम’ लैंडर को ऑर्बिटर से सफलतापूर्वक अलग कर दिया गया। अब चांद के अनदेखे दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में लैंडर के ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने और अंतरिक्ष इतिहास में नया अध्याय दर्ज करने में महज पांच दिन बचे हैं।
इसरो के अध्यक्ष के. सिवन ने पिछले महीने कहा था कि 'ऑर्बिटर’ का ‘लैंडर’ से अलग होना दुल्हन का पिता का घर छोड़ने जैसा होगा। विक्रम सात सितंबर को रात एक बजकर 55 मिनट पर सॉफ्ट लैंडिंग के जरिए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतरेगा। ‘चंद्रयान-2’ मिशन की इस सबसे जटिल प्रक्रिया में यदि इसरो को सफलता मिलती है तो अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। इसके साथ ही अंतरिक्ष इतिहास में भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतरने वाला दुनिया का पहला देश बन जाएगा।