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चंद्रयान-2: वक्त के साथ धूमिल हो रहीं उम्मीदें, विक्रम की जिंदगी बचाने को सिर्फ हफ्ते भर का समय

Sat, 14 Sep 2019 02:52 AM IST
संदीप भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू

सार

  • विक्रम की जिंदगी बचाने के लिए हफ्ते भर का ही वक्त
  • इसरो की एक टीम दिन-रात चंद्रयान-2 के लैंडर से संपर्क की कोशिश में
  • लैंडर की बैटरी खत्म होने की आशंका से वैज्ञानिकों में बढ़ी चिंता
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विस्तार
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सात सितंबर को हार्ड लैंडिंग के चलते चांद की सतह पर पडे़ चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम से संपर्क की उम्मीद वक्त के साथ धूमिल होती जा रही है। विक्रम की जिंदगी बचाने के लिए भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के पास अब एक हफ्ते का ही वक्त रह गया है।

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दरअसल, विक्रम और उसके भीतर मौजूद रोवर प्रज्ञान को चांद की सतह पर एक चंद्र दिवस (धरती के 14 दिन के बराबर) का वक्त गुजारना था। ऐसे में इसरो के पास अब थोड़ा ही वक्त बचा है।

इसरो के एक वैज्ञानिक ने बताया, जैसे-जैसे वक्त गुजरता जा रहा है, विक्रम से संपर्क करना जटिल होता जा रहा है। उसकी बैटरी खत्म हो रही है। वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है कि अगर बैटरी खत्म हो गई तो विक्रम में जान फूंकने के लिए उसे बिजली देने वाला कोई नहीं होगा। हर गुजरते मिनट के साथ हालात बदतर ही होते जा रहे हैं। एक वैज्ञानिक ने बताया कि विक्रम दूर और दूर होता दिख रहा है।
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इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क की एक टीम विक्रम से संपर्क की कोशिश में दिन-रात लगी हुई है। बीते सात सितंबर को ेविक्रम को सॉफ्ट लैंडिंग करनी थी, मगर चांद की सतह से ठीक 2.1 किमी पहले ही विक्रम का संपर्क इसरो से टूट गया था।

हालांकि, बाद में चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने हार्ड लैंडिंग के बाद सतह पर पडे़ विक्रम को खोज निकाला था, जिसके बाद वैज्ञानिकों में फिर उम्मीद जगी थी। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा भी विक्रम से संपर्क करने की कोशिशों में जुटा है।

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अब सौर पैनल ही सहारा

इसरो के वैज्ञानिक ने बताया कि विक्रम की स्थिति फिलहाल जस की तस है। यह अब भी बिजली पैदा कर सकता है। यह अपनी बैटरियों को सौर पैनलों से रिचार्ज कर सकता है। हालांकि, इसमें किसी तरह की प्रगति की उम्मीद अब धुंधली हो चली है।

हार्ड लैंडिंग से सही दिशा में नहीं विक्रम

इसरो के एक और वैज्ञानिक ने बताया, चांद की सतह पर विक्रम की हार्ड लैंडिंग ने उससे संपर्क करने के प्रयास को बेहद दुरूह बना दिया है। यह सही दिशा में नहीं है, जिससे विक्रम इसरो द्वारा भेजे जा रहे रेडियो संकेतों को ग्रहण नहीं कर पा रहा है। सतह पर झटके से उतरने के चलते हो सकता है कि विक्रम को खासा नुकसान पहुंचा हो।
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