रामवृक्ष यादव भारतीय करेंसी के समानांतर अपना सिक्का चलाना चाहता था, जिस पर सुभाष चंद्र बोस छपे हों। वह कहता था कि यही सिक्का आजाद हिंद बैंक की करेंसी माना जाए। इसी तरह के लोकलुभाव बातें करके उसने जवाहरबाग में दूर-दूर से अनुयायियों को एकत्र किया था।
मथुरा के जवाहरबाग कांड की स्क्रिप्ट तैयार करने वाले रामवृक्ष यादव के दाहिने हाथ रहे चंदन बोस ने यह खुलासा पत्रकारों के सम्मुख किया। शाकाहार व सदाचार का संदेश बांटने वाले बाबा जय गुरुदेव का भरोसेमंद सहयोगी रामवृक्ष को हिंसक बनाने वाला यह शख्स परशुरामपुर थानाक्षेत्र में अपनी ससुराल से पत्नी पूनम के साथ पकड़ा गया है।
वहां अपने ससुर रामलाल तिवारी के घर पहचान छिपाकर रह रहा था। मुखबिर की सूचना पर स्वाट टीम ने मुकामी पुलिस के सहयोग से उसे दबोच लिया। एसपी कृपाशंकर सिंह ने बुधवार को उसे पत्नी के साथ पत्रकारों के सम्मुख प्रस्तुत किया। चंदन ने बताया कि 2010 में लुधियाना में जय गुरुदेव की संगत थी। जिसमें वह भी गया था। तब तक रामवृक्ष यादव बाबा के सबसे करीबी थे। धीरे-धीरे रामवृक्ष से उसके संबंध प्रगाढ़ होते
गए।
बोस ने ही रामवृक्ष को दी थी जवाहरबाग पर कब्जे की सलाह
ramvriksha yadav
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, मथुरा-बरेली
पुलिस के अनुसार जय गुरुदेव की मृत्यु के बाद संपत्ति से बेदखल होने पर रामवृक्ष को इसी ने आक्रामक रास्ता अख्तियार करने की सलाह दी। उसने बताया कि जवाहरबाग में कब्जा कर समानान्तर सरकार चलाने वाले रामवृक्ष के कागजी कामकाज और रुपयों के हिसाब आदि का जिम्मा चंदन बोस पर ही था।
एसपी ने बताया कि रामवृक्ष का दाहिना हाथ कहे जाने वाला यह शख्स चंदन बोस मूल रूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला है। उसका फाइनेंसर राकेश बाबू गुप्ता बदांयू का रहने वाला है। जो हथियारों की व्यवस्था भी करता था। राकेश बाबू के ऊपर पैसों का इंतजाम करने का जिम्मा रहता था।
एसपी ने संयुक्त टीम को पांच हजार रुपये पुरस्कार घोषित किया है। एसपी ने बताया कि जवाहरबाग में 2 जून को हुई गोलीबारी में मथुरा के फरह थाने के एसओ संतोष यादव को गोली मारने के मामले में रामवृक्ष यादव के साथ उसका खास सलाहकार चंदन बोस, गिरीश यादव और राकेश गुप्ता मुख्य आरोपी हैं। इन तीनों की तलाश में पुलिस दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई जिलों की खाक छानती रही। सूत्रों के अनुसार अलग-अलग जिले में वे भी दबोच लिए गए।