सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है जिसमें कहा गया था कि शादी के इरादे से धर्म परिवर्तन को स्वीकार नहीं किया जा सकता। गत 23 सितंबर को हाईकोर्ट द्वारा दिए गए इस फैसले में दंपति को पुलिस संरक्षण देने से भी इनकार कर दिया था।
वास्तव में इस मामले में एक मुस्लिम लड़की ने हिंदू धर्म अपनाया और हिंदू लड़के से शादी की। वकील अल दानिश रैन द्वारा दायर इस याचिका में कहा गया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला गलत नजीर बनेगा और इससे अलग-अलग धर्म के लोग धर्म परिवर्तन कर दूसरे धर्म में शादी नहीं कर पाएंगे। याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट के आदेश ने एक लाचार और गरीब जोडे़ को परिवारवालों के रहमोकरम पर छोड़ दिया है।
याचिकाकर्ता ने कहा, हाईकोर्ट ने नूरजहां बेगम केस में 2014 में दिए गए फैसले को गलत तरीके से परिभाषित करते हुए कहा है कि केवल शादी के इरादे से धर्म परिवर्तन नहीं हो सकता। याचिकाकर्ता ने कहा, हाईकोर्ट के इस आदेश का हवाला देकर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शादी के लिए धर्म परिवर्तन के मुद्दे को उठाया।