राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू
- फोटो : Agency (File Photo)
संसद के मानसून सत्र में विपक्ष ने पहले दिन सरकार को जमकर घेरा। लोकसभा और राज्यसभा दोनों की कार्यवाही स्थगित हुई। यहां तक प्रधानमंत्री को संसद के सदस्यों से मंत्रिमंडल के नए सदस्यों का परिचय कराने में हंगामे का सामना करना पड़ा। प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर आरोप भी लगाया कि वह दलितों, पिछड़ों, महिलाओं को मंत्री के रूप में नहीं देखना चाहता। इस दौरान सदस्यों ने कार्य स्थगन प्रस्ताव और ज्वलंत मुद्दे पर चर्चा का नोटिस भी दिया।
राज्यसभा में 10 दलों के 17 सदस्यों ने कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया। हालांकि सभापति वेंकैया नायडू ने इनमें से किसी भी नोटिस को स्वीकार नहीं किया। इस बारे में सभापति वेंकैया नायडू ने कहा कि 17 नोटिस में से केवल एक नोटिस कोरोना संक्रमण के हालात पर चर्चा कराने से संबंधित था। शेष 16 नोटिस अन्य विषयों से जुड़े थे। एक दल के सदस्यों ने दो विषयों पर कार्यस्थगन के प्रस्ताव का नोटिस दिया था। वेंकैया नायडू ने कहा कि उन्होंने सभी नोटिस को ध्यान से पढ़ा और इनमें से एक भी निर्धारित कामकाज को स्थगित करके उस विषय पर चर्चा कराने के योग्य नहीं पाया।