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सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और कैट की भी नहीं सुनते एसएससी के चेयरमैन, जानिए क्या है मामला 

Sat, 17 Nov 2018 07:06 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 
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कर्मचारी चयन आयोग
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स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (एसएससी) के चेयरमैन सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और कैट की भी नहीं सुन रहे हैं। पहले कैट ने कहा, याचिकाकर्ता को नौकरी दे। नियमानुसार ये उसका हक बनता है। कैट के खिलाफ एसएससी वाले हाईकोर्ट चले गए, मगर यहां भी उन्हें वही सुनने को मिला कि कैट सही कह रहा है। अब एसएससी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। यहां भी कैट के फैसले को बरकरार रखा गया। इतना कुछ होने पर भी एसएससी नहीं मानी तो याचिकाकर्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट में अदालत की अवमानना का केस डाल दिया। हाईकोर्ट ने इस केस में एसएससी चेयरमैन को लताड़ लगाते हुए कहा, सोमवार तक याचिकाकर्ता को नौकरी दो या फिर अदालत में खुद पेश होकर अवमानना के मामले का सामना करे।
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ये है मामला, कब क्या हुआ...

अधिवक्ता अनिल सिंघल के मुताबिक, याचिकाकर्ता श्रेय बजाज ने वर्ष 2013 के दौरान दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर पद के लिए एसएससी द्वारा आयोजित परीक्षा दी थी। इसमें एसएससी ने उतने ही परीक्षार्थी चयनित किए, जितने पद खाली थे। इसके साथ ही वेटिंग लिस्ट भी जारी कर दी गई। इस लिस्ट में श्रेय सातवे नंबर पर था। कुछ दिन बाद उसे पता चला कि चयनित उम्मीदवारों में किन्हीं कारणों के चलते 11 लोगों ने नौकरी ज्वाइन नहीं की। 

श्रेय ने पहले तो इस बाबत एसएससी अधिकारियों के समक्ष अपना पक्ष रखा। वहां इस मुद्दे पर किसी ने श्रेय की मदद नहीं की। श्रेय ने मजबूरन कैट का दरवाजा खटखटाया। उसने कैट को बताया, सब इंस्पेक्टर के 11 पद खाली हो गए हैं और वेटिंग लिस्ट में उसका नंबर 7वां है। अतः वेटिंग लिस्ट में से नंबर वाइज उम्मीदवारों का चयन कर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाए। कैट ने मामले की सुनवाई के बाद मई-2016 में एसएससी को निर्देश दिया कि मौजूदा परीक्षार्थियों से इन 11 खाली पदों को भरा जाए।
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कैट के खिलाफ एसएससी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई, मगर कोई राहत नहीं मिली

कैट के इस आदेश को एसएससी ने पहले दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। केस की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी। इसके बाद एसएससी सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गई। यहां भी उनकी अपील खारिज हो गई। अब ऐसे हालात में एसएससी के पास कैट के निर्देशों का पालन करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था। इन सबके बाद भी लेकिन एसएससी अपनी जिद पर अड़ी रही। अधिवक्ता अनिल सिंघल ने इसे सीधे तौर पर अदालत की अवमानना का मामला बताते हुए हाईकोर्ट में केस डाल दिया।

हाईकोर्ट ने जताई हैरानी, कहा अभी तक अदालत के आदेशों का पालन नहीं हुआ

अवमानना के मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने हैरानी जताई कि अभी तक इस अदालत के आदेश का पालन नहीं किया गया है। अदालत ने इसे अवमानना का मामला बताते हुए कहा, अब इस पर आगे की कार्यवाही शुरू की जाए। अदालत ने इस मामले में एसएससी चेयरमैन को एक आखिरी मौका देते हुए कहा, सोमवार तक वे कोर्ट के आदेश का पालन करें, अन्यथा अवमानना की कार्यवाही का नोटिस लेने के लिए खुद हाईकोर्ट में पेश हों। कैट के अधिवक्ता अनिल सिंघल का कहना है कि इस मामले में हाईकोर्ट एसएससी चेयरमैन पर जुर्माना लगाने के अलावा उन्हें जेल भेज सकती है।
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