मुंबई में तैनात एक जीएसटी अधीक्षक और एक ऑनलाइन सट्टेबाजी वेबसाइट से जुड़ी एक निजी कंपनी के वकील की भूमिका सीबीआई जांच के घेरे में आ गई है। अधिकारियों ने बताया कि मामला 22 लाख रुपये की रिश्वत से जुड़ा है, जो कोलकाता में तैनात एक अन्य जीएसटी खुफिया अधिकारी को दी जा रही थी। इस मामले में सीबीआई ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है।
यह कार्रवाई जीएसटी खुफिया अधिकारी विवेक प्रताप सिंह की शिकायत पर हुई। सिंह ने सीबीआई को बताया कि उन पर दबाव डालकर रिश्वत देने की कोशिश की जा रही है ताकि एक निजी कंपनी के खिलाफ चल रही कार्यवाई को रोका जा सके। इसके बाद सीबीआई ने 'रिवर्स ट्रैप' लगाकर राम सेवक सिंह और सचिन कुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया।
जीएसटी चोरी से संबंधि खुफिया जानकारी इकट्ठा कर रहे थे सिंह
विवेक प्रताप सिंह को जीएसटी चोरी से संबंधित खुफिया जानकारी इकट्ठा करने का काम सौंपा गया था। पूछताछ के दौरान, उन्हें एक विदेशी ऑनलाइन सट्टेबाजी वेबसाइट द्वारा जीएसटी का अनुपालन न करने के बारे में जानकारी मिली, जिसके www.lordexch.com, www.lordsexch.com और www.lotusbook247.com से लिंक थे। पूछताछ के दौरान, उन्हें एक UPI आईडी bankg.artimbe@oxymoney मिली, जिसका बैंकिंग नाम Artimbe It Private Limited था, जो उपरोक्त सभी लिंक्स में समान था।
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सिंह ने कंपनी को नोटिस जारी कर मांगे दस्तावेज
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम से प्राप्त विवरण से अधिकारी सिंह को एक बैंक खाता संख्या 8859370474 मिला, जो प्रीपेड भुगतान उपकरण जारीकर्ता, ऐपनिट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा था, जिसके निदेशक नितिन कपूर थे। सिंह ने कंपनी को एक नोटिस जारी कर केवाईसी, एओएफ, बैंक स्टेटमेंट आदि का विवरण मांगा, और कपूर से उनके मोबाइल फोन पर संपर्क करके उनसे ऐपनिट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड का खाता खोलने का फॉर्म और बैंक स्टेटमेंट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।
प्रियंका ने कंपनी का वकील बताते हुए सिंह से मिलने का मांगा समय
इसके बाद, सिंह को प्रियंका नाम की एक महिला ने फोन किया। उसने खुद को कंपनी की वकील बताया और मामले के निपटारे के लिए सिंह से व्यक्तिगत रूप से मिलने का समय मांगा। सिंह ने मिलने से इनकार करते हुए डाक से दस्तावेज भेजने को कहा। इसके बाद, मुंबई स्थित जीएसटी विभाग में अधीक्षक होने का दावा करने वाले अभिषेक नाम के एक व्यक्ति का फोन आया, जिसने कथित तौर पर सिंह को एक करोड़ रुपये की रिश्वत के बदले कंपनी के खिलाफ कार्रवाई बंद करने की पेशकश की। कथित तौर पर उसने फोन कॉल के जरिये दो और मौकों पर यही पेशकश दोहराई। सिंह ने तुरंत सीबीआई को सूचित किया और एक आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसने रिश्वत देने वाले को निशाना बनाने के लिए एक जाल बिछा दिया।
सीबीआई ने सिंह को अभिषेक से मिलने कोलकाता भेजा
इसके बाद सीबीआई ने सिंह को अभिषेक से कोलकाता के एक फाइव-स्टार होटल में मिलने भेजा। सिंह को सीबीआई ने गुप्त रिकॉर्डिंग डिवाइस से लैस किया था। होटल में अभिषेक ने उनसे कहा कि वे मामला निपटाने के लिए वकील प्रियंका से कम से कम 20 लाख रुपये रिश्वत की मांग करें। इसके बाद, रेस्त्रां में लंच के दौरान प्रियंका भी मौजूद थी। वहीं, पर अभिषेक ने सिंह को 22 लाख रुपये देने का ऑफर किया और प्रियंका ने इसे मान लिया। तय हुआ कि रकम दिल्ली में सौंपी जाएगी।
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इस मामले में इन लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया मामला
बाद में, सीबीआई ने दिल्ली में जाल बिछाया और रकम पहुंचाने आए दो आरोपियों- राम सेवक सिंह और सचिन कुमार गुप्ता को 22 लाख रुपये की रिश्वत के साथ गिरफ्तार कर लिया। सीबीआई की एफआईआर के मुताबिक, इस मामले में अभिषेक कटियार, अधीक्षक लेखा परीक्षा अनुभाग, प्रधान आयुक्त कार्यालय, केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) मुंबई पूर्व, वकील प्रियंका सिंह और दो कंपनियां- आर्टिम्बे इट प्राइवेट लिमिटेड व ऐपनिट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।