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कारा में धांधली के आरोप में सीईओ की विदाई, संयुक्त सचिव भी नपी

Thu, 09 Jul 2020 02:41 AM IST
अवधेश कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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Ministry of Women and Child Development
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भारत में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से संबद्ध अनाथ बच्चों के दत्तक प्रक्रिया का नियमन करने वाली संस्था केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) में लगातार मिल रही धांधली और घपलों की शिकायतों की जांच के बाद सीईओ/मेंबर सेक्रेटरी दीपक कुमार को पद से हटा दिया गया है। इसके साथ ही निकाय की संयुक्त सचिव आस्था खतवानी से भी कार्यभार वापस ले लिया गया है।
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मंत्रालय की प्रारंभिक जांच में धर्म विशेष की विदेशी एजेंसियों को नियमों में ढील देकर बच्चा गोद लेने का प्रकरण सामने आने पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने मनोज कुमार को कारा का जिम्मा सौंपा है। इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की जा रही है। हर साल देश-विदेश में चार हजार से ज्यादा बच्चों को गोद देने की जिम्मेदारी कारा की है। 

वर्ष 2016 से अब तक कारा ने देश में 12,860 बच्चों को गोद दिया, जबकि विदेशों में 2,548 बच्चों को गोद दिया गया। कारा पर इन्हीं बच्चों को गोद देने में पैसे के लेन-देन के साथ बड़े पैमाने पर धांधली करने का आरोप है। यह प्रकरण प्रधानमंत्री कार्यालय और महिला और बाल विकास (डब्ल्यूसीडी) मंत्रालय को मिल रही शिकायतों के बाद सामने आया। इसके बाद शुरू हुई जांच में बच्चा गोद देने से लेकर प्राधिकरण में विभागीय नियुक्तियों में अनियमितताओं की पोल खोल कर रख दी है। अनियमितताओं का पता लगने के बाद संयुक्त सचिव से उनका कार्यभार लेकर अनुराधा चगती को सौंप दिया गया। मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार जांच की आंच कई अन्य वरिष्ठों पर भी आ सकती है। 
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रिश्तेदारों को किया भर्ती 

इस मामले में अमर उजाला को मिले दस्तावेजों में गोद देने से लेकर विभागीय नियुक्तियों तक में नियम कायदों को ताक पर रख देने की गवाही दे रहे हैं। कारा परिसर में ही अवैध रूप से कर्मचारियों को रखकर देश भर के बालगृहों पर निगरानी रखने वाले सर्वर से भी छेड़छाड़ की जांच की जा रही है। सीईओ के पद पर तैनाती पाने वाला दीपक कुमार नियम- कायदों को दरकिनार करके पूरी तरह से अपना राज चला रखा था। 

उसने अपने रिश्तेदारों को कारा में भर्ती कर लिया था। इसके लिए पहले वह उन्हें चपरासी के पद पर नियुक्त करता और फिर उन्हें निकाय का सलाहकार बनाकर मोटा वेतन देता था। दीपक कुमार ने हालांकि कारा में किसी भी अनियमितता से इनकार किया है। अपने ऊपर लगे आरोपों पर अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि कारा की व्यवस्था को चाक चौबंद कर दी थी, इसलिए काम न करने वाले कर्मचारियों ने ही साजिशन उन पर आरोप लगाएं हैं।  
 
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