राज्यों से मिली जानकारी के अधार पर एनआईसी के परामर्श से विकसित एक पोर्टल पर 27 करोड़ से अधिक अव्यवस्थित श्रमिकों और प्रवासी मजदूरों का पंजीकरण किया गया है। यह जानकारी केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दी है।
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को कहा है कि राज्यों की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर लगभग 27.45 करोड़ अव्यवस्थित श्रमिक या प्रवासी मजदूर एक पोर्टल पर पंजीकृत किए गए हैं। केंद्र की ओर से पेश हुईं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एश्वर्या भाटी ने बताया कि कामगारों के पंजीकरण के लिए यह पोर्टल नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) के परामर्श से विकसित किया गया है।
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न्यायाधीश एमआर शाह और बीवी नागरत्न की पीठ ने भाटी से पूछा कि अव्यवस्थित श्रमिकों या प्रवासी कामगारों के हितों की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार और संबंधित राज्य इनके पंजीकरण का किस तरह से उपयोग करने जा रहे हैं? पीठ ने आगे कहा कि पंजीकरण का एक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इन लोगों तक केंद्र या राज्य सरकारों की ओर से शुरू की गई योजनाओं का लाभ पहुंच सके।
केंद्र और राज्य सरकारों को दिया निर्देश
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अनुपालन रिपोर्ट को रिकॉर्ड में रखने के लिए पीठ से कुछ समय मांगा। इस पर पीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह राज्यों से सभी जरूरी जानकारी एकत्र करे ताकि अव्यवस्थित श्रमिकों और प्रवासी कामगारों के हितों की सुरक्षा के लिए आगे का आदेश जारी किया जा सके। पीठ ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी जानकारियां साझा करने का निर्देश दिया।
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अब 20 जुलाई को होगी आगे की सुनवाई
पीठ ने मामले की सुनवाई की अगली तारीख 20 जुलाई तय की है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल में केंद्र और राज्यों से चार सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट मांगी थी। इस रिपोर्ट में यह जानकारी मांगी गई थी कि प्रवासी कामगारों को भोजन और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से जून 2021 को जारी किए गए आदेश का पालन करने के लिए क्या कार्रवाई की गई है।