गृह मंत्रालय ने कश्मीरी पंडितों के कम्पोजिट टाउनशिप के लिए जम्मू सरकार से फिर भूमि की मांग की है। मुफ्ती मोहम्मद की सरकार ने इस मुद्दे पर मंत्रालय को जमीन उपलब्ध कराने का वादा किया था लेकिन अलगाववादियों के विरोध के कारण मुद्दे को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अब मंत्रालय ने नए सिरे से जम्मू कश्मीर की नई सरकार पर इसके लिए दबाव बनाया है।
साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पंडितों के लिए घोषित पैकेज को भी शीघ्र लागू करने के लिए कहा है। गृह राज्यमंत्री हरिभाई परथीभाई चौधरी ने कहा है कि केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर की सरकार से घाटी में कम्पोजिट टाउनशिप के लिए जमीन की पहचान करने के लिए कहा है, जहां कश्मीरी विस्थापितों को उचित रूप से पुनर्वासित किया जा सके। आगे की कार्रवाई भूमि की पहचान के बाद ही संभव है। पूरे देश में कश्मीरी पंडितों के 62000 परिवार पंजीकृत हैं। आतंकवाद के कारण कश्मीरी पंडितों का घाटी से पलायन हुआ था।
जम्मू में 40000, दिल्ली और एनसीआर में 20000 एवं देश के अन्य हिस्सों में पंडितों के 2000 परिवार बसे हुए हैं। केंद्र सरकार ने कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी के लिए कार्ययोजना बनाई है लेकिन टाउनशिप के मुद्दे पर जम्मू कश्मीर सरकार ने उत्साह नहीं दिखाया है। जम्मू कश्मीर में भाजपा भी सरकार में शामिल है लेकिन घाटी में वोट बैंक के मद्देनजर पीडीपी इस मसले को आगे बढ़ाने पर गंभीर नहीं दिखती है। पिछले साल मुफ्ती मोहम्मद की सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए जमीन की पहचान का काम शुरू किया था लेकिन अलगाववादियों ने अड़ंगा डाल दिया। पीडीपी के कई नेता भी इसके विरोध में हैं। इस बीच कश्मीरी पंडितों के कई गुट भी इस मुद्दे पर बंटे नजर आए।
कश्मीरी पंडितों को उनके पुराने घरों में बसाना सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं हैं। इसलिए केंद्र सरकार ने अलग टाउनशिप विकसित करने की योजना बनाई है। अब पीडीपी चाहती है उस टाउनशिप को सिर्फ कश्मीरी पंडितों के लिए नहीं बल्कि सभी वर्गों के लिए संयुक्त टाउनशिप बनाई जाए। केंद्र इस पर सहमत नहीं है। गृह राज्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कश्मीरी पंडितों के लिए विशेष पैकेज का एलान किया था । इसके तहत पंडितों को 3000 नौकरियां उपलब्ध कराई जानी है। इससे पहले जिन पंडितों को केंद्र और राज्य की ओर से नौकरियां उपलब्ध कराई गई हैं, उनके पुनर्वास के लिए भी आवास बनाया जाना है। केंद्र सरकार ने 6000 आवासों के लिए 2000 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। केंद्र ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर इस पैकेज को जल्द कार्यान्वित करने को कहा है।