केरल के वित्त मंत्री द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने कहा कि मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री लोगों को मूर्ख बना रहे हैं। केंद्र की नीतिओं के कारण नहीं बल्कि केरल सरकार की फिजूलखर्ची ने राज्य को वित्त संकट में डाला।
केरल के वित्तीय संकट को लेकर केंद्र सरकार ने कटाक्ष किया है। केंद्र सरकार ने सोमवार को आरोप लगाया कि राज्य की वित्तीय संकट के लिए केंद्र की कोई नीतियां नहीं बल्कि केरल की सत्तारूढ़ वामपंथी प्रशासन की फिजूलखर्ची और विलासिता जिम्मेदार है।
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केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने पूछा कि क्या केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन मूर्ख थे या इस मुद्दे पर जनता को गुमराह करने के लिए मूर्ख बन रहे थे। मुरलीधरन ने यह भी दावा किया कि सीएम और राज्य के वित्त मंत्री केएन बालगोपाल हमेशा केंद्र द्वारा नहीं दिए गए फंड के अलग-अलग आंकड़े बताते हैं।
केरल सरकार पर हमला करते हुए उन्होंने कहा, आप केरल के मुख्यमंत्री हैं। आपको मूर्ख नहीं बनना चाहिए। राज्य मंत्री ने तर्क दिया, केरल के मुख्यमंत्री को देश के कानूनों के बारे में पता होना चाहिए। उन्हें राज्य की वित्तीय स्थिति के बारे में भी पता होना चाहिए।
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बता दें उनकी प्रतिक्रिया राज्य के वित्त मंत्री बालगोपाल द्वारा वित्तीय मामलों में केरल और अन्य विपक्षी शासित राज्यों के प्रति केंद्र द्वारा भेदभाव का आरोप लगाने के एक दिन बाद आई है। कहा गया है कि राज्य इसके खिलाफ कानूनी उपाय तलाशेगा। बालगोपाल ने रविवार को कोल्लम में पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि केंद्र वित्तीय मामलों में राजस्थान और छत्तीसगढ़ सहित विपक्षी शासित राज्यों के प्रति बेहद भेदभावपूर्ण व्यवहार कर रहा है। उनमें से सबसे ज्यादा भेदभाव केरल को झेलना पड़ रहा है।
वहीं केंद्रीय राज्यमंत्री मुरलीधरन ने दावा किया कि कल्याण पेंशन में केंद्र की हिस्सेदारी सहित कई आवंटन और अनुदान पहले ही राज्य को दिया जा चुका है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि अगर राज्य वित्तीय संकट में था तो उसने कल्याण पेंशन की अगली किस्त के लिए अनुरोध क्यों नहीं किया।