मंत्री ने कहा कि ईडी ने उस घोटाले की जांच शुरू की, जिसका अधिकार हमारे पास है। जबकि भाजपा नेता जिन घोटालों में शामिल हैं, उनकी जांच नहीं की गई। पिछले चार साल में सभी बोर्ड और निगम में घोटाले सामने आए, लेकिन ईडी ने उनकी जांच नहीं की।
कर्नाटक के राजस्व मंत्री कृष्णा बायर गौड़ा का कहना है कि केंद्र कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार को गिराने के लिए ईडी का इस्तेमाल कर रहा है। राज्य में हुए वाल्मिकी कॉरपोरेशन घोटाले में गिरफ्तार लोगों पर ईडी वरिष्ठ नेताओं का नाम बताने का दबाव बना रही है। गौड़ा ने दावा किया कि झारखंड, दिल्ली, केरल, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल की तरह की केंद्र कर्नाटक में भी ईडी के जरिये सरकार पर दबाव बना रहा है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी, आयकर विभाग और सीबीआई के जरिये विपक्ष को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी ने कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर ली और लोकतंत्र को बचाने के लिए सड़क पर उतरेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा को अहसास हो गया है कि वह 2019 की तरह कांग्रेस और जदएस सरकार को गिरा नहीं सकती है। इसलिए अब ईडी का सहारा लिया जा रहा है।
उन्होंने ईडी पर घोटाले में शामिल आरोपियों के खिलाफ अच्छी कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। ईडी घोटालेबाजों को गिरफ्तार नहीं कर रही है। मंत्री ने कहा कि ईडी ने उस घोटाले की जांच शुरू की, जिसका अधिकार हमारे पास है। जबकि भाजपा नेता जिन घोटालों में शामिल हैं, उनकी जांच नहीं की गई। पिछले चार साल में सभी बोर्ड और निगम में घोटाले सामने आए, लेकिन ईडी ने उनकी जांच नहीं की।
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गौड़ा ने कहा कि एक रिपोर्ट के मुताबिक ईडी ने 400 फीसदी ज्यादा केस दर्ज किए हैं। इनमें से 95 फीसदी केस विपक्षी पार्टियों के नेताओं के खिलाफ दर्ज किए गए हैं। जबकि शेष पांच फीसदी केस भाजपा और उसे सहयोगी दलों के नेताओं के खिलाफ दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि एक बार जो घोटालेबाज भाजपा का सदस्य बन जाता है, तो उसका केस बंद कर दिया जाता है। ऐसा हमने महाराष्ट्र, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, बिहार और असम में देखा है।
यह था मामला
कर्नाटक की महर्षि वाल्मिकी अनुसूचित जनजाति विकास निगम में लेखा विभाग के अधीक्षक चंद्रशेखर पी ने 26 मई को आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने एक सुसाइड नोट छोड़ा था। इसके बाद निगम में बड़ा घोटाला सामने आया। नोट में निगम के खाते से 187 करोड़ रुपये अवैध तरीके से ट्रांसफर किए गए। इसमें से 88.62 करोड़ रुपये आईटी कंपनी और हैदराबाद की एक सहकारी बैंक में अवैध रूप से भेजे गए। घोटाले का आरोप लगने के बाद अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री बी नागेंद्र ने छह जून को इस्तीफा दे दिया था। मौजूदा समय में वे ईडी की हिरासत में हैं।