जजों की नियुक्ति के लिए अपनाई जाने वाली कॉलेजियम प्रक्रिया को लेकर केंद्र और सुप्रीम कोर्ट के बीच टकराव बढ़ता ही जा रहा है। कॉलेजियम को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने उसके सुझाए दो अधिवक्ताओं को बॉम्बे हाईकोर्ट में अतिरिक्त जज के तौर पर नियुक्त किया है। वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट में जज बनाने के लिए प्रस्तावित वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ कृपाल के नाम पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम को फिर विचार करने को कहा है। सौरभ कृपाल एलजीबीटी समुदाय से आते हैं और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस बीएन कृपाल के पुत्र हैं। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने कई अन्य नामों के साथ उनका भी नाम कॉलेजियम को लौटा दिया है।
सौरभ के नाम की सिफारिश पिछले वर्ष 11 नवंबर को तत्कालीन सीजेआई एनवी रमण के नेतृत्व में कॉलेजियम ने की थी। कॉलेजियम ने 2017 में भी कृपाल का नाम सुझाया था, लेकिन सरकार द्वारा सिफारिश प्रक्रिया रोक दी गई। खुद कृपाल ने कुछ समय पूर्व एक साक्षात्कार में कहा था कि उनके स्वभावगत लैंगिक-रुझान की वजह से उन्हें जस्टिस नहीं बनाया जा रहा है। अगर उनके नाम पर सरकार सहमति दे देती है तो वे देश के पहले समलिंगी जस्टिस हो सकते हैं।
इस बीच, कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने ट्वीट कर संतोष गोविंदराव चपलगांवकर और मिलिंद मनोहर साथाये की बॉम्बे हाईकोर्ट में नियुक्ति की जानकारी दी। सामान्य तौर पर अतिरिक्त जजों को दो साल के लिए नियुक्त किया जाता है। इसके बाद उन्हें स्थायी नियुक्ति दी जाती है। एक नवंबर की स्थिति के मुताबिक, बॉम्बे हाईकोर्ट में जजों के 28 पद रिक्त थे।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी फटकार
केंद्र ने यह कदम तब उठाया गया है जब सोमवार को कॉलेजियम की सिफारिश के बावजूद जजों की नियुक्ति में देरी के मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए केंद्र को फटकार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को फटकार लगाते हुए कहा था कि कानून है उसे तो मानना ही होगा। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि केंद्र के इस रवैये से न्यायिक प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार इस बात से नाखुश है कि राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग(NJAC) ने संवैधानिक मस्टर पास नहीं किया। बता दें कि दो दिन पहले केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू ने कहा था कि कॉलेजियम नहीं कह सकता कि सरकार उसकी तरफ से भेजा हर नाम तुरंत मंजूरी करे। फिर तो उन्हें खुद नियुक्ति कर लेनी चाहिए।
केंद्र ने लौटाई थीं कॉलेजियम को फाइलें
कॉलेजियम मुद्दे पर सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच खींचतान जारी है। वहीं सोमवार को जानकारी सामने आई थी कि सरकार ने उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम से उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति से जुड़ी 20 फाइलों को लौटा दिया है। साथ ही कहा है कि कॉलेजियम इन पर फिर से विचार करे। इन फाइलों में अधिवक्ता सौरभ कृपाल की नियुक्ति की फाइल भी शामिल है। गौरतलब है कि उन्होंने हाल ही में अपने समलैंगिक होने के बारे में खुलकर बात की थी। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया से जुड़े सूत्रों ने बताया था कि सरकार ने 25 नवंबर को कॉलेजियम को फाइलें वापस भेजी थीं।