गुजरात विधानसभा चुनावों का अभी पहला चरण भी नहीं हुआ है और भाजपा ने दक्षिण भारत में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए नेताओं को नया टास्क दे दिया है। दक्षिण भारत में होने वाले विधानसभा चुनावों के साथ-साथ लोकसभा चुनावों की नींव को मजबूत करने के लिए पार्टी ने जो टास्क दिया है, उसे पूरा करने के लिए नेताओं की टीम दक्षिण भारत के अलग-अलग राज्यों में रवाना भी हो गई है। पिछले हफ्ते दक्षिण भारत के चुनावों पर नजर रखने के लिए पार्टी के प्रमुख नेताओं के साथ एक अहम बैठक हुई थी, उसमें 45 दिनों के भीतर पूरा करने वाला एक विशेष टास्क दिया गया था। बकायदा इस टास्क की मॉनिटरिंग के लिए भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने एक कोर कमेटी तैयार कर डेढ़ महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
दक्षिण भारत के चुनावों को लेकर समीक्षा बैठक
भाजपा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक बीते शुक्रवार को गुजरात चुनावों की गहमागहमी के बीच पार्टी आलाकमान ने दक्षिण भारत के चुनावों की समीक्षा बैठक की। इस समीक्षा बैठक में बीते तीन माह से दक्षिण के राज्यों में भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा किए जाने वाले कार्यों की न सिर्फ़ समीक्षा की गई, बल्कि अगले डेढ़ महीने यानी 45 दिनों का नया टास्क भी दे दिया गया। भाजपा से जुड़े नेताओं का कहना है कि इस नए टास्क में पार्टी को बूथ स्तर पर की जाने वाली सभी तैयारियों का न सिर्फ आकलन करना है, बल्कि उसकी पूरी रिपोर्ट तैयार कर संबंधित राज्य प्रभारियों के माध्यम से केंद्रीय नेतृत्व को सौंपना भी है। इस टीम में शामिल भाजपा के वरिष्ठ नेता बताते हैं कि उनकी पार्टी बीते कुछ समय से लगातार दक्षिण भारत में अपने नेटवर्क को न सिर्फ मजबूत कर रही है, बल्कि अपनी उसी रणनीति को आगे भी बढ़ा रही है, जिसके आधार पर उत्तर भारत में भाजपा ने भगवा फहराया है।
सूत्रों का कहना है कि अगले डेढ़ महीने के भीतर जिस टास्क को पूरा करने के लिए केंद्रीय नेतृत्व ने जिम्मेदारियों दी हैं, उनमें बूथ स्तर पर तैयार की जाने वाली भाजपा की अपनी पूरी रिपोर्ट होगी। इस टीम में शामिल वरिष्ठ नेता कहते हैं कि उनकी सबसे मजबूती बूथ स्तर पर तैयार किए जाने वाले पन्ना प्रमुख की कमेटियां होती हैं। वह कहते हैं कि भाजपा अगले कुछ दिनों में बूथ स्तर पर मजबूत टीम को तैयार करेगी। उनका कहना है कि आगामी विधानसभा के चुनावों को ध्यान में रखते हुए वोटर लिस्ट के बाद पन्ना प्रमुखों का चयन भी कर लिया जाएगा। भाजपा ने इसके लिए बकायदा कर्नाटक और तेलंगाना में तीन नेताओं को जिम्मेदारियां भी दी हैं, जो पूरी रिपोर्ट जिम्मेदार नेताओं से लेंगे और राज्य प्रभारियों के माध्यम से केंद्रीय नेतृत्व को सौंपी जाएगी।
बढ़ाए जाएंगे नेताओं के दौरे
भाजपा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि गुजरात चुनाव परिणामों के बाद से ही भाजपा नेताओं के दौरे दक्षिण भारत के राज्यों में बढ़ा दिए जाएंगे। इसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर राष्ट्रीय महासचिव और अन्य तमाम संगठन से जुड़े नेताओं को भेजा जाएगा। इसके अलावा योजना के मुताबिक केंद्रीय मंत्रिमंडल के वरिष्ठ नेताओं का दक्षिण के राज्यों का दौरा भी बढ़ाया जाएगा। सियासी जानकारों का कहना है कि भाजपा ने बीते कुछ महीनों में जिस तरीके से दक्षिण भारत की ओर अपना रुख किया है और बड़े नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपी हैं, वह दक्षिण में गढ़ को मजबूत करने की तैयारी है।
पीटी उषा को बनाया भारतीय ओलंपिक संघ का अध्यक्ष
राजनीतिक विश्लेषक पीएन शिवकुमार कहते हैं कि दक्षिण भारत में होने वाली किसी भी हलचल को राजनैतिक घटनाक्रम से ही जोड़कर देखा जाना चाहिए। वह कहते हैं कि जिस तरीके से भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष पद पर पहली बार किसी महिला को निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया है, वह भी दक्षिण भारत के चुनावी नजरिए से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिवकुमार कहते हैं कि भाजपा ने राजनैतिक रूप से दक्षिण भारत में न सिर्फ अपने नेताओं को जिम्मेदारियां देकर वहां पर लोगों से राजनीतिक नक्शा टटोलकर रणनीति बनाने के लिए भेजा है, बल्कि संभावनाओं वाले राज्यों में खासतौर से कर्नाटक और तेलंगाना में रणनीति बनाने वाले बड़े नेताओं को भी मोर्चे पर लगा दिया है।
अगले साल होने वाले कर्नाटक चुनावों में भाजपा ने जनसंपर्क यात्रा की शुरुआत कर दी है। मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के मुताबिक पार्टी को जमीनी स्तर पर संगठित करने के लिए वो 'जन संपर्क यात्रा' के तहत विधानसभा क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। इस यात्रा को बहुत समर्थन मिल रहा है। कर्नाटक भाजपा से जुड़े नेताओं का कहना है जनसंपर्क यात्रा के माध्यम से भाजपा की मजबूत पकड़ बनेगी।