केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए), 2019 के लिए नियम बनाने के लिए राज्यसभा और लोकसभा में अधीनस्थ विधान पर संसदीय समितियों से सातवीं बार विस्तार दिया गया है। सूत्रों ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि राज्यसभा में अधीनस्थ विधान संबंधी संसदीय समितियों द्वारा सीएए नियमों को बनाने का समय इस वर्ष 31 दिसंबर तक और लोकसभा में अधीनस्थ विधान संबंधी संसदीय समितियों द्वारा 9 जनवरी, 2023 तक बढ़ा दिया गया है।
फिर मिला विस्तार
संसदीय समितियों ने एमएचए द्वारा किए गए अनुरोध का संज्ञान लेते हुए सीएए के नियमों का विस्तार करने के लिए एक बार और समय विस्तार दिया है। दरअसल, इससे पहले का समय विस्तार 9 अक्तूबर को समाप्त हो गया था। इससे पहले, गृह मंत्रालय ने संसदीय समितियों से छह बार इसी तरह के विस्तार के लिए समय मांगा था। सीएए नियमों को अधिसूचित करने के लिए संसदीय समितियों ने जून 2020 में पहला विस्तार दिया था। नागरिकता संशोधन अधिनियम 11 दिसंबर, 2019 को संसद द्वारा पारित किया गया था। इसके अगले दिन इसके लिए राष्ट्रपति की मंजूरी आई थी। हालांकि, कानून अभी लागू होना बाकी है क्योंकि सीएए के तहत नियम बनाए जाने अभी बाकी हैं।
बाद में जनवरी 2020 में, गृह मंत्रालय ने अधिसूचित किया कि अधिनियम 10 जनवरी, 2020 से लागू होगा, लेकिन बाद में मंत्रालय ने राज्य सभा और लोकसभा में संसदीय समितियों से नियमों को लागू करने के लिए कुछ और समय देने का अनुरोध किया क्योंकि उस समय देश कोविड-19 महामारी के दौर से गुजर रहा था।
गौरतलब है कि सीएए के जरिए केंद्र सरकार बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए गैर-मुस्लिमों को भारतीय नागरिकता देना चाहती है। हालांकि, इसके अधिसूचित होने के बाद से नियम बनाने के लिए अब तक छह बार समय बढ़ाने की मांग की जा चुकी है।
सीएए के नियम न बन पाने के पीछे क्या वजह?
संसदीय कार्य संबंधी नियमावली के मुताबिक, राष्ट्रपति की सहमति के छह महीने के अंदर ही किसी भी कानून के लिए नियम तैयार कर लिए जाने चाहिए। या फिर लोकसभा और राज्यसभा के अंतर्गत आने वाली संसदीय समितियों से विस्तार का अनुरोध किया जाना चाहिए। हालांकि, गृह मंत्रालय सीएए कानून बनने के छह महीने के अंदर नियम नहीं बना सका। इसलिए उसने पहली बार जून 2020 में और फिर छह बार समितियों से नियम बनाने के लिए और समय मांगा।
सीएए के जरिए मोदी सरकार पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के हिंदुओं, सिखों, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई जैसे प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता प्रदान करना चाहती है। कानून के तहत इन समुदायों के जो लोग 31 दिसंबर, 2014 तक भारत आए थे और जो वहां धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर रहे थे, उन्हें अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा और उन्हें भारतीय नागरिकता दी जाएगी। इससे पहले संसद में सीएए पारित होने के बाद, देश के विभिन्न हिस्सों में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे जिसमें पुलिस गोलीबारी और संबंधित हिंसा में लगभग 100 व्यक्तियों की मौत हो गई।