धर्म परिवर्तन का विकल्प चुनने वाले अनुसूचित जनजातियों के लोगों के लिए आरक्षण के संबंध में जन भावनाओं के बारे में केंद्र जागरूक है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक भाजपा सांसद ने धर्म परिवर्तन करने वाले एसटी समुदाय के ऐसे लोगों का आरक्षण लाभ खत्म करने की मांग पर यह प्रतिक्रिया जताई। राय ने कहा कि इस मुद्दे पर निर्णय लेने से पहले लोगों की राय के अलावा सभी प्रासंगिक मामलों पर विचार करना होगा।
नित्यानंद राय भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की मांग पर जवाब दे रहे थे, जिन्होंने पिछले साल दिसंबर में लोकसभा में इस मुद्दे को उठाया था। इसमें कहा गया था कि धर्म परिवर्तन का विकल्प चुनने वाले एसटी को आरक्षण और अन्य लाभ को रद्द कर दिया जाना चाहिए ताकि धर्मांतरण को रोका जा सके। झारखंड के सांसद दुबे ने कहा था कि उनके गृह राज्य में धर्म परिवर्तन एक प्रमुख मुद्दा है और लालच और प्रलोभन से धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है।
दुबे को जवाब देते हुए राय ने कहा कि सरकार धर्म परिवर्तन के बाद अनुसूचित जनजातियों को आरक्षण लाभ के संबंध में जनता की भावनाओं के प्रति सचेत है। ऐसे अनुरोधों पर किसी भी निर्णय में जनता की राय और सभी संबंधित प्रासंगिक मामलों को ध्यान में रखना होगा। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार सार्वजनिक व्यवस्था राज्य का विषय है और जबरन धर्मांतरण राज्यों के दायरे में आता है और वे धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए कानून बनाने में सक्षम हैं।