गोरखपुर में एम्स के निर्माण के सपने को हकीकत में बदलने में अभी लंबा वक्त लगेगा। एम्स के निर्माण की घोषणा के दो साल बाद अब तक इस संस्था के लिए राज्य सरकार जमीन उपलब्ध नहीं करा पाई है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि फिलहाल प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित जमीन पर कुछ भी स्पष्ट नहीं है। इसके अलावा सड़क संपर्क का बड़ा सवाल भी अब तक अनसुलझा है।
निर्माण प्रक्रिया शुरू होने में हो रही देरी के मद्देनजर स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने राज्य के मुख्यमंत्री अलिखेश यादव को बुधवार को पत्र लिखकर प्रस्तावित जमीन से जुड़े सभी पहलुओं को स्पष्ट करने की मांग की है। स्वास्थ्य मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि धन की कमी का कोई सवाल नहीं है। मुख्य सवाल मानक के अनुरूप जमीन उपलब्ध कराने और निर्माण स्थल से सड़क संपर्क का है।
सूत्र बताते हैं कि प्रदेश सरकार ने एम्स के लिए पहले बीआरडी कॉलेज से 9 किमी दूर खुटहन में जगह सुझाई थी। इस जमीन का विवाद न्यायालय के अधीन होने कारण इस प्रस्ताव को टाल दिया गया। नए सिरे से धुरियापुर चीनी मिल की जमीन का प्रस्ताव दिया गया। स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि इस जमीन पर भी स्पष्टता का अभाव है।
राज्य सरकार अगर गंभीर होती तो एम्स के निर्माण के लिए सारी बाधाएं खत्म कर जमीन केंद्र को इस परियोजना के लिए सौंप चुकी होती। स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने भी कहा कि नए सिरे से प्रस्तावित जमीन पर भी स्पष्टता का अभाव है। इसके अलावा सड़क संपर्क का मामला भी नहीं सुलझा है। निर्माण कार्य तत्काल शुरू कराया जा सके, इसके लिए उन्होंने फिर से मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।