Central Vista Project Live Update in Hindi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 28 फुट ऊंची प्रतिमा का भी अनावरण करेंगे। ग्रेनाइट पत्थर पर उकेरी गई इस प्रतिमा का वजन 65 मीट्रिक टन है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 28 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया। ग्रेनाइट पत्थर पर उकेरी गई इस प्रतिमा का वजन 65 मीट्रिक टन है।
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प्रतिमा को अमर जवान ज्योति के स्थान पर स्थापित किया गया
बुधवार इसे उसी स्थान पर स्थापित किया गया, जहां बीते 23 जनवरी पराक्रम दिवस पर नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण किया गया था। प्रतिमा को अमर जवान ज्योति के स्थान पर स्थापित किया गया है। प्रतिमा को मूर्तिकार अद्वैत गडनायक ने बनाया है। अद्वैत राष्ट्रीय मॉर्डन आर्ट गैलरी के प्रमुख हैं।
पीएम मोदी ने किया नेता जी की प्रतिमा का अनावरण
- फोटो : अमर उजाला
गणतंत्र दिवस परेड के लिए आमंत्रित किया जाएगा
पीएम मोदी ने दिल्ली में सेंट्रल विस्टा के पुनर्विकास परियोजना में शामिल कार्यकर्ताओं से बातचीत की। पीएम मोदी ने 'श्रमजीवियों' से कहा कि वह 26 जनवरी गणतंत्र दिवस परेड के लिए सेंट्रल विस्टा के पुनर्विकास परियोजना पर काम करने वाले सभी लोगों को आमंत्रित करेंगे।
पीएम मोदी ने किया नेता जी की प्रतिमा का अनावरण
- फोटो : ANI
प्रतिमा को बनाने में करीब 26,000 घंटे लगे
नेताजी की प्रतिमा को बनाने में करीब 26,000 घंटे लगे हैं। प्रतिमा ग्रेनाइट को तराशकर तैयार की गई है। इसका वजन 65 मीट्रिक टन है। काले रंग के ग्रेनाइट पत्थर से बनी यह प्रतिमा 28 फुट ऊंची है। इसे अरुण योगीराज के नेतृत्व में मूर्तिकारों के एक दल ने तैयार किया है। ग्रेनाइट के इस अखंड पत्थर को तेलंगाना के खम्मम से 1665 किलोमीटर दूर नई दिल्ली तक लाने के लिए 100 फुट लंबा 140 पहियों वाला एक ट्रक विशेष तौर पर तैयार किया गया था।
कई टोल प्लाजा के फाटक तोड़ने पड़े
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा के लिए विशाल ग्रेनाइट पत्थर को तेलंगाना से लेकर दिल्ली लाने वाले 100 फुट लंबे ट्रक को गुजरने के लिए खास इंतजाम करने पड़े। इसलिए राजमार्गों पर कुछ टोल प्लाजा के फाटकों को अस्थाई रूप से तोड़ना पड़ा।
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- फोटो : istock
1972 में किया था अमर जवान ज्योति का उद्घाटन
अमर जवान ज्योति की स्थापना उन भारतीय सैनिकों की याद में की गई थी जो 1971 के भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए थे। इस युद्ध में भारत की विजय हुई थी और बांग्लादेश का गठन हुआ था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 26 जनवरी 1972 को अमर जवान जोत का उद्घाटन किया था।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बेटी अनीता बोस फाफ ने कहा कि खुशी है कि इतने दशकों के बाद भारतीय देशवासियों ने उनका नाम और स्मृति बरकरार रखी। उन्होंने भारत के निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे आजाद भारत में पैर नहीं रख सके। मेरी इच्छा है कि कम से कम उनके अवशेष अपनी मातृभूमि पर लौट आएं और एक अंतिम विश्राम स्थल खोजें। दस्तावेज इस बात का प्रमाण है कि 18 अगस्त 1945 को वर्तमान ताइवान में विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई थी। मुझे उम्मीद है कि उनकी अस्थियां देश में वापस लाई जाएंगी।