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निर्देश: विजिलेंस क्लीयरेंस चाहिए तो अचल संपत्ति की जानकारी समय पर दें केंद्रीय अधिकारी

Tue, 22 Mar 2022 06:31 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

सभी मंत्रालयों व विभागों से भी कहा गया है कि वे अपने उन अधिकारियों को ब्यौरा दाखिल करने के लिए कहें जिनके विजिलेंस इनपुट आयोग से मांगे गए हैं।
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central vigilance commission - फोटो : PTI (File Photo)
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विस्तार
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केंद्रीय सतर्कता आयोग ने सरकारी अधिकारियों को अपनी अचल संपत्ति का ब्यौरा समय पर दर्ज करवाने के निर्देश दिए हैं। ब्यौरा देने पर ही उन्हें विभागों व मंत्रालयों में वरिष्ठ पदों पर जाने के लिए बने पैनल में शामिल करने की अनिवार्य विजिलेंस क्लीयरेंस मिल सकेगी। पूर्व निर्धारित नियम के तहत अधिकारियों की संपत्ति की जानकारी क्लीयरेंस के लिए जरूरी है।

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आयोग ने आदेश में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के निर्देश का हवाला देते हुए कहा कि केंद्रीय सेवाओं व पदों पर तैनात अफसर अगर सालाना अचल संपत्ति ब्यौरा दायर नहीं करते हैं, तो उन्हें क्लीयरेंस नहीं मिलेगी। वे भारत सरकार द्वारा वरिष्ठ पदों पर तैनाती के लिए बनाए जा रहे पैनल में शामिल नहीं हो पाएंगे।

सभी मंत्रालयों व विभागों से भी कहा गया है कि वे अपने उन अधिकारियों को ब्यौरा दाखिल करने के लिए कहें जिनके विजिलेंस इनपुट आयोग से मांगे गए हैं। भविष्य में आयोग से मांगी गई क्लीयरेंस के पत्र में अधिकारी ने समय पर अपनी अचल संपत्ति का ब्यौरा दिया था या नहीं, यह भी बताया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार के अधिकारियों को हर साल 31 जनवरी से पहले समस्त अचल संपत्ति का ब्यौरा देना होता है। 
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भ्रष्ट अफसरों पर कार्रवाई करें बैंक
केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों व सरकारी विभागों से कहा कि भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करें। साथ ही वर्ष 2020-2021 की कार्रवाई रिपोर्ट 30 जून तक अवश्य भेज दें। किसी अधिकारी पर आरोप साबित होते हैं तो जांच प्रक्रिया पूरी करने के बाद, सक्षम प्राधिकारी को अंतिम आदेश देना चाहिए। उचित दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए।

विभाग को आयोग और सीवीसी को भी अंतिम आदेश के बारे में सूचित करना होगा। आयोग के संज्ञान में आया है कि अंतिम आदेश और दंडात्मक कार्रवाई तय करने के बाद भी आदेश लागू ही नहीं होते। ऐसे में अनुशासनात्मक कार्रवाई का कोई अर्थ ही नहीं रह जाता।

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