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जेटली ने वामदलों पर लगाया आपातकाल के समर्थन का आरोप, कहा- भाकपा ने किया क्रूर नियम का समर्थन

Wed, 27 Jun 2018 07:42 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने आपातकाल को लेकर वामदलों पर हमला किया है। उन्होंने कहा कि भाकपा ने आपातकाल का समर्थन किया, जबकि माकपा ने क्रूर नियमों के खिलाफ संघर्ष में कोई भूमिका नहीं निभाई। ‘द इमरजेंसी रिविजिटेड’ के तीसरे और आखिरी खंड में जेटली ने सवाल उठाया है कि राम मनोहर लोहिया के समाजवादी अनुयायी कांग्रेस के साथ कैसे और कितने समय तक काम कर पाएंगे।

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केंद्रीय मंत्री ने लिखा कि भारत के वामदलों को लेकर वह हमेशा उलझन में रहे हैं।

भाकपा तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की ओर से 25 जून, 1975 को लगाए गए आपातकाल की बेशर्म समर्थक रही है। उसका कहना था कि आपातकाल फासीवाद के खिलाफ लागू किया गया। माकपा सैद्धांतिक तौर पर आपातकाल के खिलाफ थी, लेकिन इसके खिलाफ संघर्ष में कभी सक्रिय नहीं रही। माकपा के सिर्फ दो सांसद गिरफ्तार किए गए। माकपा पोलित ब्यूरो व केंद्रीय समिति सदस्यों और छात्र नेताओं को कभी हिरासत में नहीं लिया गया।

समाजवादी नेताओं ने किया था कांग्रेस का विरोध
कांग्रेस से टूटकर बनी कांग्रेस (ओ), सोशलिस्ट पार्टी, स्वतंत्र पार्टी, जन संघ, आरएसएस ही आपातकाल के खिलाफ सत्याग्रह और विरोध में सक्रिय रहे थे। आपातकाल के बाद जॉर्ज फर्नांडीस, मधु लिमये और राज नारायण ने सोशलिस्ट नेता राम मनोहर लोहिया की परंपरा को आगे बढ़ाया। ये सभी कांग्रेस का विरोध करते रहे। 
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Arun Jaitley
डॉ. लोहिया के अनुयायी कांग्रेस से गठबंध को हैं तैयार
अब उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव और बिहार में नीतीश कुमार डॉ. लोहिया की परंपरा पर चल रहे हैं। हालांकि, दोनों में कांग्रेस का विरोध गायब है। मुलायम की पार्टी कांग्रेस के साथ गठबंधन को तैयार रहती है। 

कब तक साथ रहेंगे लोहिया और नेहरू के अनुयायी
जेटली को संदेह रहता है कि डॉ. लोहिया और पंडित जवाहरलाल नेहरू के राजनीतिक डीएनए का प्रतिनिधित्व करने वाले लोग कितने समय तक साथ काम कर पाएंगे। जेटली के इस बयान को लोकसभा चुनाव, 2019 के मद्देनजर कांग्रेस, सपा, तृणमूल कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों के गठबंधन पर सवाल उठाने के तौर पर देखा जा रहा है।  

मीडिया से झुकने को कहा, तो वो रेंगने लगा जेटली कहते हैं कि आपातकाल के दौरान केंद्र सरकार का रवैया तानाशाही हो गया था और पूरा सिस्टम चरमरा गया था। सुप्रीम कोर्ट का महत्व खत्म कर दिया गया था। मीडिया चापलूसी कर रहा था। आपातकाल के बाद लालकृष्ण आडवाणी ने मीडिया से कहा था कि जब आपसे झुकने को कहा गया, आपने रेंगना शुरू कर दिया। 

दो लाख से ज्यादा झूठे मामले दर्ज किए गए
दो लाख से ज्यादा झूठे मामले दर्ज किए गए थे। किसी पुलिस अधिकारी ने इसका विरोध भी नहीं किया। आधार नहीं होने के बाद भी हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया। किसी जिलाधिकारी ने गैरकानूनी हिरासत के आदेशों पर हस्ताक्षर करने से इनकार नहीं किया। 

जस्टिस खन्ना के बजाय बेग को बनाया सीजेआई
इंदिरा गांधी ने जस्टिस एचआर खन्ना को दरकिनार कर जस्टिस बेग को सुप्रीम कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) नियुक्त किया। जस्टिस खन्ना ने पद से इस्तीफा दे दिया। तब पलखीवाला ने टिप्पणी की थी कि अब मुख्य न्यायाधीश का पद उनके लिए बहुत छोटा हो गया है। 
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