मनरेगा के बकाये को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र आमने-सामने हैं। राजभवन के खास सूत्रों की माने तो राज्यपाल सीवी आनंद बोस के हस्तक्षेप के बाद केंद्र सरकार को मनरेगा के बकाये को लेकर पश्चिम बंगाल के साथ जारी झगड़े के समाधान की संभावना है।
मनरेगा के बकाये् को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र आमने-सामने हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार केंद्र पर इस मुद्दों को लेकर हमला करती आई है। बीते दिनों टीएमसी द्वारा दिल्ली में केंद्र सरकार के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया गया था। साथ ही कोलकाता स्थित राजभवन के बाहर भी टीएमसी कार्यकर्ताओं के साथ अभिषेक बनर्जी अनशन पर बैठक गए थे। मनरेगा के बकाये को लेकर राज्य सरकार और केंद्र के बीच विवाद सुलझ सकता है। केंद्र सरकार बकाया भुगतान कर सकती है।
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राजभवन के खास सूत्रों की माने तो राज्यपाल सीवी आनंद बोस के हस्तक्षेप के बाद केंद्र सरकार को मनरेगा के बकाए को लेकर पश्चिम बंगाल के साथ जारी झगड़े के समाधान की संभावना है। टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी सहित टीएमसी नेताओं ने राज्यपाल सीवी आनंद बोस के साथ बैठक की थी, जिसके बाद उन्होंने ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की थी।
अधिकारियों ने संकेत दिया कि बकाया जल्द ही जारी होने की संभावना है, इसको लेकर हालांकि कोई समयसीमा तय नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि बकाया जारी करना कुछ शर्तों पर निर्भर करेगा जैसे कि ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत करना आदि। केंद्र सरकार ने पहले कहा था कि केंद्रीय निर्देशों का पालन न करने के कारण ग्रामीण नौकरी योजना के लिए धन बंगाल को जारी नहीं किया गया था।
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मंत्रालय ने एक बयान में कहा था, 'केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन न करने के कारण महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 की धारा 27 के प्रावधान के अनुसार पश्चिम बंगाल राज्य का फंड 9 मार्च, 2022 से रोक दिया गया है।