केंद्रीय कर्मचारियों को अब अवकाश यात्रा रियायत (एलटीसी) के दौरान दैनिक भत्ता नहीं दिया जाएगा। नियमों के मुताबिक, कर्मचारियों को अपने घर और अन्य जगह की यात्रा के लिए छुट्टी के साथ-साथ टिकट का खर्च भी सरकार की ओर से दिया जाता है।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के आदेश में कहा गया है कि पहले कर्मचारियों को उनके पद के मुताबिक एलटीसी के साथ-साथ दैनिक भत्ता भी दिया जाता था। लेकिन अब कम दूरी की यात्रा के दौरान कर्मचारियों को यदि अचानक से कोई खर्च करना पड़ जाए तो एलटीसी के तहत सरकार इसे स्वीकार नहीं करेगी।
हालांकि सुविधा या प्रीमियम ट्रेनों की यात्रा और तत्काल सेवा जैसे अतिरिक्त खर्चों का वहन एलटीसी के दायरे में ही किया जाएगा। नया नियम एक जुलाई 2017 से मान्य होगा। एलटीसी में वही यात्रा मान्य होगी जो सरकार या सार्वजनिक क्षेत्रों के वाहन से की गई हो।
डीओपीटी में कहा गया है कि एलटीसी के तहत कर्मचारियों को यदि राजधानी, शताब्दी, दुरंतो ट्रेनों से सफर करने की इजाजत है तो इनमें लागू फ्लेक्सी किराये का वहन मान्य होगा।
लेकिन जिन कर्मचारियों को डायनामिक फेयर की सुविधा नहीं है और वे विमान यात्रा करते हैं तो उन्हें इन ट्रेनों के टिकट का भुगतान नहीं किया जाएगा। यदि दो स्थानों के बीच की यात्रा में सार्वजनिक परिवहन का कोई साधन नहीं है तो केंद्रीय कर्मियों को अधिकतम 100 किलोमीटर की दूरी का खर्च दिया जाएगा।
इसके लिए उन्हें प्राइवेट या निजी वाहन से सफर करने का प्रमाण देना होगा। यह कदम सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार उठाया गया है। इसके तहत यात्रा भत्ते में बदलाव किया गया है।