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सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट से सालाना बचेंगे एक हजार करोड़, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

Wed, 04 Nov 2020 03:32 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
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Central Vista project - फोटो : Twitter
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केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 20 हजार करोड़ रुपये के सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पैसे की बर्बादी नहीं है, बल्कि इससे पैसों की बचत होगी। इस प्रोजेक्ट से सालाना करीब एक हजार करोड़ रुपये की बचत होगी, जो फिलहाल दस इमारतों में चल रहे मंत्रालयों के किराये पर खर्च होते हैं। साथ ही इस प्रोजेक्ट से मंत्रालयों के बीच समन्वय में भी सुधार होगा। 

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जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वर्तमान संसद भवन गंभीर आग और जगह की भारी कमी का सामना कर रहा था। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट के तहत हैरिटेज बिल्डिंग को संरक्षित किया जाएगा। मेहता ने कहा कि मौजूदा संसद भवन 1927 में बना था। जिसका उद्देश्य विधान परिषद के भवन का निर्माण था न कि दो सदन का था।


उन्होंने कहा कि जब लोकसभा और राज्यसभा का संयुक्त सत्र आयोजित होती हैं, तो सदस्य प्लास्टिक की कुर्सियों पर बैठते हैं। इससे सदन की गरिमा कम होती है। केंद्र सरकार ने सेंट्रल विस्टा के पुनर्विकास में पर्यावरण संबंधी चिंताओं का पूरा ध्यान रखा है।
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मेहता ने कहा कि नए संसद भवन की समयसीमा 2022 है। उन्होंने कहा कि संसद का स्वामित्व लोकसभा सचिवालय के पास रहेगा। कई लोकसभा अध्यक्षों के अलावा अन्य लोगों ने यह संकेत दिया था कि वर्तमान संरचना अपर्याप्त है। उन्होंने कहा कि एक अलग स्वतंत्र अध्ययन की आवश्यकता नहीं है। मेहता ने यह भी कहा कि नई संसद होनी चाहिए या नहीं, यह एक नीतिगत निर्णय है, जो सरकार को लेना होता है।

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