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समलैंगिक विवाह को हमारे कानून, समाज व मूल्यों में मान्यता नहीं: केंद्र सरकार

Tue, 15 Sep 2020 02:36 AM IST
Kuldeep Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Same sex marriage - फोटो : Pixabay
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केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि समलैंगिक जोड़े के विवाह को अनुमति नहीं है। हमारे कानूनों, कानूनी प्रणाली, समाज और मूल्यों में इसको मान्यता नहीं दी गई है। हाईकोर्ट हिंदू मैरिज एक्ट और स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है।

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केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया, समलैंगिक जोड़ों को विवाह की अनुमति नहीं दे सकते
चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस प्रतीक जैन की पीठ के समक्ष सोमवार को सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का विरोध करते हुए कहा, समलैंगिक विवाह को दो कारणों से मान्यता देने या पंजीकरण करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। पहला याचिका में अदालत को कानून बनाने को कहा गया है। दूसरा किसी भी तरह की राहत विभिन्न सांविधानिक प्रावधानों के विपरीत मानी जाएगी।

समलैंगिक शादी में कैसे होगा पति और पत्नी का निर्धारण
समलैंगिक जोड़ों को विवाह की अनुमति देने संबंधी याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ऐसी शादी में पति-पत्नी का निर्धारण कैसे होगा? उन्होंने कहा, हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों में में पति और पत्नी की बात है। एक लिंग के लोग शादी करेंगे तो यह कैसे तय होगा?
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इस मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस डीएन पटेल की पीठ ने जनहित याचिका की जरूरत पर भी सवाल उठाया। पीठ ने कहा, इससे प्रभावित होने का दावा करने वाले लोग पढ़े-लिखे हैं और खुद कोर्ट जा सकते हैं। ऐसे में हम जनहित याचिका पर क्यों सुनवाई करें? इस पर याचिकाकर्ता वकील अभिजीत अय्यर मित्रा कहा, ऐसे लोगों के सामने आने पर उनके बहिष्कार का डर था, इसलिए जनहित याचिका दायर की गई।

वहीं, केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे मेहता ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को केवल आपराधिक इस पर पीठ ने याचिकाकर्ता वकील से ऐसे समलैंगिक जोड़ों की जानकारी देने को कहा, जिनकी शादी को पंजीकरण कराने की अनुमति नहीं दी गई। पीठ ने उन्हें तथ्यात्मक पहलुओं को पेश करने का आदेश दिया है। अब मामले की अगली सुनवाई 21 अक्तूबर को होगी।

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