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अब सर्कस में नहीं दिखाई देंगे जानवर, प्रतिबंध लगाने की तैयारी

Fri, 30 Nov 2018 08:34 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
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आप सभी ने बचपन में सर्कस में जानवरों को कलाबाजियां करते हुए तो जरूर देखा होगा। लेकिन अब केंद्र सरकार एक विधेयक लाने वाली है जिससे जानवरों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लग जाएगा। यह विधेयक पास होने के बाद सर्कस में कोई भी जानवर परफॉर्म करता हुआ नहीं दिखेगा। शेर और बाघ जोकि सर्कस से बहुत लंबे समय तक जुड़े रहे हैं, उनपर पहले से ही प्रतिबंध लगा हुआ है। अब घोड़े, गैंडे, हाथी और कुत्ते भी आपको सर्कस में नजर नहीं आएंगे।

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यह नियम बनाने के पीछे लंबे समय से पशु कार्यकर्ताओं की मांग है। इससे जानवरों के साथ दुराचार नहीं होगा और न ही उन्हें एक छोटी सी जगह में रहने को मजबूर होना पड़ेगा। साथ ही उन्हें वह करतब नहीं दिखाने होंगे जिससे उन्हें दर्द होता है और वह अपनी प्राकृतिक प्रवृत्ति भूल जाते हैं। इस कानून से उन जानवरों को राहत मिलेगी जो असहनीय दर्द वाली ट्रेनिंग से गुजरते हैं। जानवरों की अनुपस्थिति से सर्कस का व्यवसाय सीमित हो जाएगा और केवल इंसान परफॉर्म करते हुए दिखाई देंगे। जिसकी वजह से इसकी लोकप्रियता में कमी आएगी।
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पिछले कुछ सालों में सर्कस के प्रति लोगों की रुचि में कमी आई है। ट्रैपिज कलाकार, जोकर, चाकू फेंकने वाले और कार्टूनिस्ट एक मरता हुआ व्यवसाय बन गया है। पशु प्रदर्शन (पंजीकरण) संशोधन नियम, 2018 विधेयक के अनुसार, किसी भी जानवर को सर्कस में किसी तरह की परफॉर्मेंस या प्रदर्शनी या मोबाइल मनोरंजन के लिए नहीं रखा जाएगा। द पीपुल्स फॉर एनिमल्स (पीएफए) की पशु कार्यकर्ता गौरी मौलेखी ने बताया कि उनका संगठन पर्यावरण मंत्रालय से लगातार जानवरों पर हो रहे अत्याचार, सर्कस में करवाई जाने वाली अप्राकृतिक परफॉर्मेंस और मनोरंजन के नाम पर होने वाली क्रूरता को खत्म करने का अनुरोध करता रहा है। सर्कस संचालकों को कई बार मौके देने के बावजूद यह बदलाव प्रगतिशील और जरूरी है। 
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पेटा इंडिया के सीईओ मनिलाल वालियते ने कहा, 'सर्कस में जानवरों के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने से भारत उन देशों की सूची में आ जाएगा जो पहले ही यह निर्णय लेकर दुनिया को बता चुके हैं कि यह प्रगतिशील और संवेदनशील राष्ट्र है जो जानवरों पर होने वाले अत्याचार को बर्दाश्त नहीं करता है।' जानवरों पर लगने वाला प्रतिबंध 30 दिनों बाद तब लागू होगा जब पर्यावरण मंत्रालय को सभी हितधारकों से सुझाव मिल जाएंगे। यह उन जानवरों पर भी लागू होग जिनका वर्तमान में सर्कस में प्रयोग हो रहा है। 

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