केंद्र सरकार के 48 लाख कर्मचारियों और लगभग 60 लाख पेंशनधारियों को अब और निराश नहीं किया जाएगा। वित्त मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय परिषद की तरफ से मौजूदा दरों पर डीए देने और एरियर जारी करने की मांग आई थी। इस बाबत विचार किया जा रहा है। मामला लगभग आखिरी चरण पर है। केवल यह गुणा भाग हो रहा है कि डीए और एरियर की राशि को किस तरह से जारी किया जाए। अगर सारी राशि एक साथ दी जाती है तो इससे सरकार पर वित्तीय दबाव पड़ सकता है। शिव गोपाल मिश्रा बताते हैं, केंद्र सरकार में विभिन्न स्तरों पर कर्मियों की मांग पहुंचा दी गई है। कोरोनाकाल से सरकार अच्छी तरह वाकिफ है। हमें नहीं लगता कि सरकार अब उन कर्मियों को, जिन्होंने कोरोनाकाल में सरकार के साथ दो कदम आगे बढ़कर काम किया है, उनका हक देने में देर लगाएगी।
माना जा रहा है कि सरकार इसी माह में डीए जारी करने की घोषणा कर सकती है। अगर वित्त मंत्रालय कहीं थोड़ी बहुत कमी कर सकता है तो वह डीए को लेकर हो सकती है। हालांकि मंत्रालय के अधिकारियों के साथ जब राष्ट्रीय परिषद की बैठक हुई थी तो एक जुलाई से 28 फीसदी की बढ़ी हुई दर से कर्मियों के खाते में भत्तों की राशि जमा कराने का आश्वासन दिया गया था। जिस फॉर्मूले से डीए की गणना होती है, उसके मुताबिक, अगस्त 2019 से लेकर मई 2020 तक डीए की दर 21 फीसदी रही है। उसके बाद जनवरी 2020 से नवंबर 2020 तक 24 फीसदी, दिसंबर 2020 से मई 2021 तक 28 फीसदी और जून 2021 से जुलाई 2021 तक यह दर 31 फीसदी बनती है।
कर्मियों के स्तर 1 से 18 तक की बात करें तो 18 माह के दौरान उन्हें डीए के तौर पर 11880 रुपये से लेकर 165000 रुपये तक का नुकसान हुआ है। एआईडीईएफ के महासचिव सी. श्रीकुमार कहते हैं, 18 माह के दौरान हजारों सरकारी कर्मी मारे गए हैं। बहुत से रिटायर हो गए हैं, अब उनके नुकसान की भरपाई कौन करेगा। अगर इनके नुकसान की राशि को देखें तो वह करोड़ों में बैठती है। इसे लेकर सरकार से आग्रह किया गया है कि रिटायर्ड और मारे गए कर्मियों के आश्रितों को इन भत्तों की राशि से वंचित न रखा जाए।