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DCPCR: समलैंगिक विवाह पर समाज में जागरूकता पैदा करें केंद्र-राज्य, डीसीपीसीआर ने बच्चों को लेकर कही बड़ी बात

Fri, 07 Apr 2023 01:24 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली

सार

डीसीपीसीआर ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, पालन-पोषण पर कई अध्ययनों से पता चला है कि समिलंगी जोड़े अच्छे माता-पिता हो सकते हैं। वर्तमान में 50 से अधिक देश समलैंगिक जोड़ों को कानूनी रूप से बच्चों को गोद लेने की अनुमति देते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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समलैंगिक विवाहों को लेकर जनमानस में जागरूकता पैदा करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को उचित कदम उठाने चाहिए। उन्हें लोगों को यह भरोसा दिलाना चाहिए कि समलैंगिक परिवार भी विषमलैंगिक परिवार इकाइयों की तरह समाज में सामान्य व्यवहार है। यह बात दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) ने समलैंगिक विवाहों को कानूनी मान्यता देने की मांग वाली याचिकाओं का समर्थन करते हुए सुप्रीम कोर्ट में कही।

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मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ कर रही है। पीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर दी गई प्रस्तुतियां एक ओर सांविधानिक अधिकारों और दूसरी ओर विशेष विवाह अधिनियम सहित विशेष विधायी अधिनियमों के बीच परस्पर प्रभाव को प्रदर्शित कर रही हैं। शीर्ष अदालत ने 13 मार्च को समलैंगिक विवाहों को कानूनी मान्यता देने की मांग वाली याचिकाओं को महत्वपूर्ण मुद्दा मानते हुए संविधान पीठ के पास भेज दिया था।

अच्छे माता-पिता हो सकते हैं समलैंगिक जोड़े
डीसीपीसीआर ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, पालन-पोषण पर कई अध्ययनों से पता चला है कि समिलंगी जोड़े अच्छे माता-पिता हो सकते हैं। वर्तमान में 50 से अधिक देश समलैंगिक जोड़ों को कानूनी रूप से बच्चों को गोद लेने की अनुमति देते हैं। हम मौजूदा कानून की शब्दावली को नागरिक के मौलिक अधिकारों में बाधा नहीं बनने दे सकते हैं।
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डीसीपीसीआर ने कहा कि दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने समलैंगिक विवाहों को कानूनी मान्यता देने से संबंधित याचिकाओं में हस्तक्षेप करने वाला आवेदन दायर किया है।

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