कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि जजों की नियुक्ति में देरी के लिए सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है, क्योंकि नियुक्ति के लिए ‘मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर’ पहले ही न्यायपालिका को भेजा जा चुका है। यहां एक कार्यक्रम में जब कानून मंत्री से जजों की नियुक्ति में हस्तक्षेप के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि यह गलत धारणा है। भाजपा के नेता तो न्यायपालिका की आजादी के लिए जेल तक गए हैं। उन्होंने कहा कि कृपया इस धारणा को बदलिये।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने खुद कहा है कि जजों की नियुक्ति की मौजूदा व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। हम उस दिशा में काम कर रहे हैं। प्रसाद ने कहा कि 50 और 60 के दशक के जज शानदार थे।
कानून मंत्री ने इशारा किया कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और कैग की नियुक्ति में तो मददगार हो सकते हैं, लेकिन जजों की नियुक्ति को चुनौती नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि कोलेजियम सिस्टम से पहले भारत में जस्टिस कृष्णा अय्यर, हिदायतुल्ला, गजेंद्र गडकर और पतंजलि शास्त्री जैसे महान न्यायाधीश हुए।