केंद्र सरकार की ओर से जनगणना को लेकर अहम दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार की ओर से कहा गया है कि जनगणना के दौरान जानबूझकर कोई भी आपत्तिजनक या अनुचित प्रश्न पूछने वाले अधिकारी को दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की सजा हो सकती है। जनगणना आयुक्त द्वारा जारी नवीनतम परिपत्र में यह कहा गया है। सभी राज्यों को भेजे गए एक पत्र में, जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 11 के तहत निर्धारित दंडों की सूची दी है, जिसमें दोषी पाए जाने पर 1,000 रुपये के जुर्माने से लेकर तीन साल तक का कारावास या दोनों हो सकता है।
तीन साल तक की सजा का प्रावधान
आदेश के मुताबिक, अगर कोई जनगणना अधिकारी जानबूझकर आपत्तिजनक या अनुचित सवाल पूछता है, गलत जानकारी दर्ज करता है या बिना अनुमति किसी की निजी जानकारी उजागर करता है, तो उसे दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा, जो अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में लापरवाही बरतते हैं, आदेशों का पालन नहीं करते या जनगणना के काम में किसी तरह की बाधा डालते हैं, उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है।
नियमों में यह भी साफ किया गया है कि जनगणना से जुड़े सॉर्टर, कंपाइलर या अन्य कर्मचारी अगर किसी दस्तावेज को छिपाते हैं, नुकसान पहुंचाते हैं या आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ करते हैं, तो उन्हें भी सजा का सामना करना पड़ेगा। इस बीच, केंद्र सरकार ने केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में 2027 की जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दे दी है। खास बात यह है कि आजादी के बाद होने वाली यह 16वीं जनगणना होगी, जिसमें पहली बार जाति आधारित गणना भी शामिल की जाएगी।
सरकार इस बार पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने जा रही है। नागरिकों को खुद अपनी जानकारी दर्ज करने यानी सेल्फ-एन्यूमरेशन का विकल्प भी मिलेगा। गौरतलब है कि यह जनगणना 2021 में होनी थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के चलते इसे टाल दिया गया था। अब 2027 में इसे नए और आधुनिक तरीके से कराने की तैयारी है।