तमिलनाडु के वेलिंगटन स्थित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि यह भारतीय थलसेना, वायुसेना और नौसेना के बीच समन्वय और साझा शक्ति का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने सैन्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, एकीकरण और रणनीतिक बदलावों की महत्ता पर भी जोर दिया।
तमिलनाडु के वेलिंगटन स्थित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज (डीएसएससी) पहुंचे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने शनिवार को ऑपरेशन सिंदूर पर एक विशेष व्याख्यान दिया। इस दौरान उन्होंने भारतीय थलसेना, वायुसेना और नौसेना की एकजुट कार्रवाई को देश की सैन्य शक्ति की मिसाल बताया।
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ऑपरेशन सिंदूर को बताया तीनों सेनाओं की शक्ति का मिसाल
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, जनरल चौहान ने 81वें स्टाफ कोर्स के छात्र अधिकारियों, कॉलेज के स्थायी स्टाफ और वेलिंगटन स्टेशन के अधिकारियों को संबोधित करते हुए ऑपरेशन सिंदूर के अहम पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन तीनों सेनाओं के समन्वय और संयुक्त शक्ति का बेहतरीन उदाहरण है। साथ ही बाद में कॉलेज की फैकल्टी से बातचीत में उन्होंने सेना में एकीकरण और संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और बदलती सैन्य रणनीतियों की गहरी समझ पर जोर दिया।
कॉलेज के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स ने सीडीएस को कॉलेज की चल रही ट्रेनिंग गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैसे डीप पर्पल डिवीजन के गठन के साथ तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त अभ्यास और समझ को संस्थागत रूप दिया जा रहा है। बता दें कि फिलहाल डीएसएससी में 45 हफ्तों का 81वां स्टाफ कोर्स चल रहा है, जिसमें 500 छात्र अधिकारी प्रशिक्षण ले रहे हैं। इनमें 35 मित्र देशों से आए 45 विदेशी अधिकारी भी शामिल हैं।
ऑपरेशन सिंदूर, जिससे दहल उठा था दुश्मन
गौरतलब है कि ऑपरेशन जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर किया था। इस ऑपरेशन में भारत ने पाकिस्तान के नौ स्थानों पर आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था, जिनमें बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद और मुरिदके में लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालय शामिल थे।