केंद्रीय अप्रत्यक्ष एवं सीमा शुल्क, बोर्ड (सीबीआईसी) में लंबे समय से 'टैक्स सहायक' के पद पर काम कर रहे कार्मिकों की पदोन्नति की राह अब खुलने जा रही है। इस विभाग के लगभग 3500 'टैक्स असिस्टेंट', बहुत जल्द 'एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट' बन जाएंगे। 'वन टाइम रिलेक्सेशन' के आदेश वाली फाइल तैयार हो चुकी है। सीबीआईसी बोर्ड द्वारा तमाम औपचारिकताएं पूरी कर यह फाइल यूपीएससी को भेजी जाएगी। वहां से एक-डेढ़ माह में इस फाइल को मंजूरी मिलते ही 'टैक्स असिस्टेंट' के पद पर कार्यरत कार्मिकों के पदोन्नति आदेश जारी हो जाएंगे। वित्त मंत्रालय का राजस्व विभाग, पहले ही इस प्रपोजल को सैद्धांतिक मंजूरी दे चुका है।
इस पदोन्नति के लिए 'ऑल इंडिया सेंट्रल एक्साइज एंड सर्विस टैक्स मिनिस्ट्रियल ऑफिसर एसोसिएशन' लंबे समय से प्रयासरत रही है। संगठन सचिव हर्ष चतुर्वेदी बताते हैं कि गत नवंबर में पदोन्नति का प्रपोजल, डीओपीटी को भेजा गया था। कभी तो उस फाइल पर कोई ऑब्जेशन लग जाता है, तो कभी कोई दूसरी कमी निकाल दी जाती है। डीओपीटी ने मई में इसे अपनी मंजूरी दी है। कायदे से अब तक पदोन्नति आदेश जारी हो जाने थे, लेकिन दोबारा से कुछ तकनीकी खामियां बताकर मामला लटका दिया गया। अब यह कहा गया कि इसके लिए यूपीएससी से सलाह लें। इसके साथ यह फाइल व्यय विभाग के पास जाएगी। व्यय विभाग का केवल इतना कहना है कि दो साल से सीबीआईसी में जो पद खाली पड़े हैं, उसे रिवाइव करा लें। ऐसा न हो कि वे पद कहीं खत्म हो गए हों। वजह, लंबे समय तक जो पद खाली रहते हैं, वे एक प्रक्रिया के तहत खत्म हो जाते हैं। हालांकि ये भी महज एक औपचारिकता है।
संगठन सचिव के मुताबिक विभाग द्वारा यूपीएससी के पास जो फाइल भेजी गई थी, उसमें कई कमियां निकाल दी गईं। यूपीएससी ने वह फाइल बिना मंजूरी के वापस लौटा दी। 'संघ लोक सेवा आयोग' की ओर से कहा गया कि ये प्रपोजल पूरा नहीं है। साथ में 'वरिष्ठता सूची' भेजें। इसके बाद डीजीएचआरडी ने वरिष्ठता सूची तैयार की है। उसे बोर्ड के पास भेजा गया है। वहां से उसे जल्द ही यूपीएससी के पास भेजा जाएगा। बोर्ड में डीजी एचआरडी ने इसके लिए सारा डाटा कंपाइल किया है। अगर बोर्ड द्वारा पहले ही तमाम औपचारिकताएं पूरी कर प्रपोजल भेजा जाता तो कई माह पहले ही पदोन्नति आदेश जारी हो चुके होते। जब यह प्रपोजल यूपीएससी के पास जाएगा तो उसके बाद एक डेढ़ माह में उसे वहां से मंजूरी मिलेगी। अगर प्रपोजल हर तरह से पूर्ण है तो संघ लोक सेवा आयोग, मंजूरी देने में विलंब नहीं करता।
सीबीआईसी में टैक्स असिस्टेंट को पहले तीन साल में प्रमोशन मिलता था, अब 10 साल लग रहे हैं। मौजूदा नियमों के अंतर्गत टैक्स असिस्टेंट को अगर इंस्पेक्टर के पद पर पहुंचना है तो उसे दो तीन दशक का इंतजार करना पड़ सकता है। ऐसे में मुश्किल से दो या तीन प्रमोशन ही मिल सकेंगे। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) में टैक्स असिटेंट को तीन वर्ष में पहला प्रमोशन मिल रहा है। उन्हें अपने सेवाकाल में पदोन्नति के पांच अवसर मिल रहे हैं, जबकि दोनों विभागों की भर्ती प्रक्रिया एवं योग्यता समान है। ऑल इंडिया सेंट्रल एक्साइज एंड सर्विस टैक्स मिनिस्ट्रियल ऑफिसर एसोसिएशन ने मेरिट बेस्ड प्रमोशन का एक प्रपोजल डीओपीटी को भेजा था। राजस्व सचिव ने भी उसे अपनी मंजूरी दे दी थी। डीओपीटी से फाइल क्लीयर होती है, तो प्रमोशन में लगने वाला दस साल का समय, घटकर पांच वर्ष हो जाएगा।
कर्मचारी चयन आयोग 'एसएससी' की सीजीएल की परीक्षा पास करने के बाद वित्त विभाग के अंतर्गत केंद्रीय अप्रत्यक्ष एवं सीमा शुल्क 'सीबीआईसी' और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड 'सीबीडीटी' में टैक्स असिसेंट के पद पर नियुक्ति होती है। सीबीआईसी और सीबीडीटी में इस पद के लिए एक समान योग्यता रखी गई है। भर्ती एजेंसी और परीक्षा का स्वरूप भी एक ही है, लेकिन बात जब प्रमोशन की आती है तो 'सीबीआईसी' के टैक्स असिसेंट, 'सीबीडीटी' के मुकाबले पिछड़ जाते हैं। यहां पर टैक्स असिस्टेंट के पद पर नियुक्त हुआ व्यक्ति तीन साल में सीनियर टैक्स असिस्टेंट बनता है। उसके बाद इंस्पेक्टर बनने का नंबर आता है। दोनों ही विभागों में टैक्स असिस्टेंट के पदों पर चयन, एक परीक्षा और मानकों के तहत होता है। दोनों का काम भी एक ही जैसा होता है। प्रमोशन की बात आती है तो नियम अलग-अलग हो जाते हैं। यहीं से कार्मिकों के बीच भेदभाव की भावना पैदा हो जाती है। सीबीआईसी में तो अब दस साल में पहला प्रमोशन मिलता है। ऐसे में टैक्स असिटेंट के लिए सहायक आयुक्त, अधीक्षक या उपायुक्त के पद तक पहुंचने की संभावना लगभग खत्म सी हो चली है।
साल 2015 में सीबीआईसी ने सीनियर टैक्स असिस्टेंट का पद नाम बदलकर उसे 'एक्जीक्यूटिव असिस्टेंट' कर दिया था। इस पद तक पहुंचने के लिए कर्मचारी को 10 साल का कार्यकाल पूरा करना होगा। दूसरी तरफ, सीबीडीटी' में टैक्स असिस्टेंट को तीन साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद ही सीनियर टैक्स असिस्टेंट का प्रमोशन मिल जाता है। इतना ही नहीं, सीबीडीटी में सीनियर टैक्स असिस्टेंट बनने वाले कार्मिक को दो साल बाद इंस्पेक्टर के पद पर तरक्की दे दी जाती है। सीबीआईसी में कार्यरत टैक्स असिटेंट को 10 साल में केवल एक प्रमोशन मिल रहा है। संगठन सचिव हर्ष चतुर्वेदी ने बताया, इस तरह के नए नियम बनाने से पहले कार्मिकों की राय नहीं ली गई। दोनों विभागों में टैक्स असिटेंट की भर्ती प्रक्रिया से लेकर उनके काम करने का तरीका एक जैसा है, तो फिर पदोन्नति को लेकर यह भेदभाव क्यों। 2015 से पहले दोनों ही विभागों में प्रमोशन के नियम एक जैसे थे, लेकिन सीबीआईसी ने प्रमोशन के नियम में बदलाव कर कार्मिकों के बीच भेदभाव पैदा कर दिया है। सीबीआईसी ने 2016 में फिर से बिना स्टेकहोल्डर्स के कमेंट लिए इंस्पेक्टर के पद पर प्रमोशन के लिए कार्यकाल की अवधि को बढ़ाकर दो साल से पांच साल कर दिया। यानी सीबीआईसी में काम कर रहे एक टैक्स असिस्टेंट को 15 साल में दो प्रमोशन मिल रहे हैं। सीबीडीटी में काम कर रहे टैक्स असिस्टेंट को पांच साल में दो प्रमोशन दिए जाते हैं।
साल 2015 में जब सीबीआईसी के लिए नए नियम बनाए जा रहे थे, तो उनमें 'प्रोटेक्शन क्लॉज' का प्रावधान ही नहीं किया गया। भर्ती नियमों में यह संशोधन कराने की मांग को लेकर डीओपीटी को पांच बार फाइल भेजी गई थी। एसोसिएशन का आरोप है कि सक्सेसिव लेबल्स पर डायरेक्ट रिक्रूटमेंट नहीं होना चाहिए, डीओपीटी एवं सीबीआईसी ने इस नियम का भी पालन नहीं किया। कार्मिकों को कम से कम आधे समय में पदोन्नति मिल जाए, यानी वे दस की बजाए पांच साल में पहले प्रमोशन तक पहुंच सकें, इसके लिए 'एक बारगी 'छूट यानी वन टाइम रिलेक्सेशन मिल सकता है। राजस्व सचिव यह छूट प्रदान कर सकता है, लेकिन यहां से भी वह फाइल डीओपीटी के पास जाती है। उसमें डीओपीटी की राय या कमेंट मांगे जाते हैं। नवंबर में राजस्व सचिव की टेबल से मंजूरी पाने के बाद यह फाइल डीओपीटी के पास भेजी गई थी। वहां से मई में मंजूरी मिली है। अगर वन टाइम रिलेक्सेशन मिलता है तो प्रमोशन के लिए लगने वाला समय आधा रह जाएगा।