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सीबीआई करेगी ग्रीन पटाखों में प्रतिबंधित बेरियम नाइट्रेट मिलाने की जांच

Wed, 04 Mar 2020 06:07 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक चित्र - फोटो : Social Media
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सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों के निर्माण में प्रतिबंधित ‘बेरियम नाइट्रेट’ रसायन का प्रयोग करने के आरोपों की जांच सीबीआई को सौंपी है। चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को कहा कि ग्रीन पटाखों के निर्माण में खासतौर पर बेरियम नाइट्रेट के प्रयोग को प्रतिबंधित किया गया था। इस आदेश की अवहेलना की जांच होनी चाहिए। पीठ ने सीबीआई को जांच का आदेश देते हुए आठ सप्ताह बाद अगली सुनवाई करने का निर्णय लिया। 

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सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश उन तीन बच्चों की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया, जिनमें तमिलनाडु के पटाखा निर्माताओं पर इको-फ्रेंडली ग्रीन पटाखे बनाने में सेहत के लिए हानिकारक बेरियम नाइट्रेट का उपयोग करने का आरोप लगाया गया था।

चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की मौजूदगी वाली पीठ के सामने तीनों बच्चों की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने आरोप लगाया कि पटाखा निर्माता अदालत के आदेशों का उल्लंघन कर रहे हैं। शीर्ष अदालत ने इससे पहले केंद्र सरकार को इस मामले में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया था।
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छह पटाखा निर्माताओं को भी नोटिस

शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु के शिवकाशी के छह पटाखा निर्माताओं को भी कारण बताओ नोटिस दिया है। नोटिस में इन सभी को यह बताने का आदेश दिया गया है कि उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए?

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दो साल पहले लगाया था प्रतिबंध

शीर्ष अदालत ने अक्तूबर, 2018 में आदेश दिया था कि देश में केवल बिना बेरियम लवण वाले ग्रीन पटाखों के निर्माण की ही अनुमति होगी। अदालत ने कहा था कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा मामला होने के चलते ग्रीन पटाखों की निर्माण सामग्री की हर खेप की क्वालिटी जांच की जानी चाहिए।

पर्यावरण व वन मंत्रालय की तरफ से तैयार स्थिति रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए शीर्ष अदालत ने आदेश दिया था कि हर पटाखा फैक्ट्री में क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम स्थापित किया जाना चाहिए। साथ ही कहा था कि इस सिस्टम की निगरानी की जिम्मेदारी पेट्रोलियम व एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन के अधिकारियों को दी जाए।
 

दिल्ली-एनसीआर में धुएं से छाए कोहरे का लिया था संज्ञान

शीर्ष अदालत ने यह आदेश दिल्ली-एनसीआर में हर साल कई टन पटाखों को जलाए जाने के कारण धुएं से पनपने वाले बुरे हालात का संज्ञान लेते हुए दिया था। साथ ही वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन से भी कहा था कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद दिल्ली-एनसीआर में भारी मात्रा में पटाखे जलाए जाने के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल करें। 
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