शीर्ष अदालत ने अक्तूबर, 2018 में आदेश दिया था कि देश में केवल बिना बेरियम लवण वाले ग्रीन पटाखों के निर्माण की ही अनुमति होगी। अदालत ने कहा था कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा मामला होने के चलते ग्रीन पटाखों की निर्माण सामग्री की हर खेप की क्वालिटी जांच की जानी चाहिए।
पर्यावरण व वन मंत्रालय की तरफ से तैयार स्थिति रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए शीर्ष अदालत ने आदेश दिया था कि हर पटाखा फैक्ट्री में क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम स्थापित किया जाना चाहिए। साथ ही कहा था कि इस सिस्टम की निगरानी की जिम्मेदारी पेट्रोलियम व एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन के अधिकारियों को दी जाए।
दिल्ली-एनसीआर में धुएं से छाए कोहरे का लिया था संज्ञान
शीर्ष अदालत ने यह आदेश दिल्ली-एनसीआर में हर साल कई टन पटाखों को जलाए जाने के कारण धुएं से पनपने वाले बुरे हालात का संज्ञान लेते हुए दिया था। साथ ही वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन से भी कहा था कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद दिल्ली-एनसीआर में भारी मात्रा में पटाखे जलाए जाने के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल करें।