आखिरकार सीबीआई ने महाराष्ट्र के 400 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग केस में पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को बुधवार को हिरासत में ले लिया। मंगलवार को सीबीआई कोर्ट ने बताया था कि देशमुख उसकी हिरासत से बचने के लिए स्वास्थ्य का बहाना बना रहे हैं।
इस मामले में सीबीआई मुंबई के बर्खास्त अधिकारी सचिन वाजे समेत तीन अन्य को पहले ही हिरासत में ले चुकी है। देशमुख को मुंबई की आर्थर रोड जेल से बुधवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो ने हिरासत में ले लिया। देशमुख व अन्य के खिलाफ सीबीआई ने फिरौती का केस दायर किया है।
देशमुख इससे पहले ईडी की हिरासत में थे। मंगलवार को जांच एजेंसी ने विशेष कोर्ट से कहा था कि वह पूछताछ से बचने के लिए मुंबई के जेजे अस्पताल में कंधे के आपरेशन का बहाना बनाकर भर्ती हो गए हैं। उनके स्वास्थ्य की रिपोर्ट बुलाई जाए।
जानबूझकर टाल रहे थे सीबीआई हिरासत
सीबीआई ने कल विशेष कोर्ट में कहा था कि अनिल देशमुख मनी लॉन्ड्रिंग केस में जानबूझकर पूछताछ से बच रहे हैं। इसीलिए वह स्वास्थ्य का बहाना बनाकर अस्पताल में भर्ती हो गए। विशेष सीबीआई कोर्ट ने देशमुख को हिरासत में लेने की इजाजत दे दी थी, लेकिन चूंकि वह अस्पताल में भर्ती थे, इसलिए सीबीआई तीन अन्य आरोपियों के साथ उन्हें 1 अप्रैल को हिरासत में नहीं ले सकी थी।
जांच में कई चौंकाने वाले विवरण
विशेष सीबीआई कोर्ट में देशमुख के मामले में बहस के दौरान जांच एजेंसी के वकील ने कहा कि एजेंसी जिस भ्रष्टाचार के मामले की जांच कर रही है, जिसमें प्रथम दृष्टया 400 करोड़ से अधिक का भ्रष्टाचार शामिल है। मामले के कई चौंकाने वाले विवरण हैं जिन पर खुली अदालत में चर्चा नहीं हो सकती।
अनिल देशमुख को 11 अप्रैल तक सीबीआई हिरासत
इस बीच सीबीआई की एक विशेष कोर्ट ने बुधवार को महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को उनके और अन्य के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार के एक मामले में 11 अप्रैल तक सीबीआई की हिरासत में भेज दिया। इससे पहले कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता के दो पूर्व सहयोगियों संजीव पलांडे, कुंदन शिंदे और बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई की हिरासत में भेज दिया था। देशमुख (71) का सरकारी जे जे अस्पताल में इलाज चल रहा था और इसलिए जांच एजेंसी अन्य आरोपियों के साथ उन्हें हिरासत में नहीं ले सकी।
देशमुख की याचिका पर सुनवाई से हाईकोर्ट के दो जज हटे
बॉम्बे हाई कोर्ट के दो जजों ने महाराष्ट्र के देशमुख की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। याचिका में निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें सीबीआई को भ्रष्टाचार के एक मामले में उन्हें हिरासत में लेने की अनुमति दी गई थी। देशमुख की याचिका को न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था, लेकिन जब मामला सुनवाई के लिये आया तो न्यायमूर्ति डेरे ने कहा कि मेरे सामने नहीं और संकेत दिया कि वह इस पर सुनवाई नहीं कर रही हैं।