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'भ्रष्टाचार से सख्ती से निपटा जाना चाहिए': कोर्ट ने पूर्व सरकारी अधिकारी को सुनाई 4 साल की सजा, क्या है मामला?

Wed, 14 Oct 2026 06:12 PM IST
अमन मौर्या पीटीआई, नई दिल्ली

सार

सीबीआई की विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार के मामले में नौकरी से निकाले गए एक अधिकारी को चार साल की कड़ी सजा सुनाई है। याची के वकील ने कोर्ट से नरमी बरतने का अनुरोध किया। इस पर कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों से सख्ती से निपटना जरूरी है, जिससे कि कड़ा संदेश दिया जा सके।
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कोर्ट। (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सीबीआई की विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार के मामले में नौकरी से निकाले गए एक सरकारी अधिकारी को चार साल की कड़ी सजा सुनाई है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए ताकि कड़ा संदेश दिया जा सके। स्पेशल जज छवि कपूर ने मामले की सुनवाई की। बता दें कि नीरज खत्री को पहले ही 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट' (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) के तहत एक सरकारी कर्मचारी द्वारा आपराधिक कदाचार के लिए दोषी ठहराया जा चुका था। सीबीआई ने अधिकतम सजा की मांग करते हुए तर्क दिया कि 'भ्रष्टाचार समाज की तरक्की की इच्छाशक्ति को खत्म कर देता है' और दोषी किसी भी तरह की नरमी का हकदार नहीं है।
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खत्री के वकील ने क्या दलील दी?
खत्री के वकील ने कोर्ट से नरमी बरतने का अनुरोध करते हुए कहा कि उन्हें रीढ़ की हड्डी की पुरानी बीमारी, लगातार पीठ दर्द और पैरों के निचले हिस्से में सुन्नपन की समस्या है। दलील में यह भी कहा गया कि उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है और उनके पास अपने परिवार का भरण-पोषण करने का कोई ठोस जरिया भी नहीं है। छह अक्तूबर के आदेश में कोर्ट ने कहा, 'भ्रष्टाचार के मामलों से बहुत सख्ती से निपटा जाना चाहिए जिससे कि कड़ा संदेश दिया जा सके। अपराधियों के खिलाफ न्याय के लिए समाज की मांग पर कोर्ट उचित सजा देकर ही प्रतिक्रिया देती है।'
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अदालत ने क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि जहां बेवजह हमदर्दी और कम सजा न्याय प्रणाली में जनता के भरोसे को नुकसान पहुंचाती है, वहीं जरूरत से ज्यादा कड़ी सजा से भी बचना चाहिए। कोर्ट ने गौर किया कि खत्री को पीसी एक्ट के तहत सीबीआई के दो अन्य मामलों में भी दोषी ठहराया जा चुका है और उन मामलों में सजा पर दिल्ली हाई कोर्ट ने रोक लगा रखी है, जो उनकी दोषसिद्धि के खिलाफ अपीलों पर सुनवाई कर रहा है। कोर्ट ने कहा, 'इस तरह, उनके पिछले रिकॉर्ड को साफ-सुथरा नहीं कहा जा सकता। इसलिए, नरमी बरतने और उन्हें कम से कम सजा देने का कोई आधार नहीं है।' हालांकि, कोर्ट ने अधिकतम सात साल की सजा नहीं सुनाई, क्योंकि उसने खत्री की उम्र और इस तथ्य को ध्यान में रखा कि उन्हें सरकारी नौकरी से पहले ही बर्खास्त किया जा चुका है।
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