मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच देश के कई व्यापारिक संगठनों ने कारोबार पर असर पड़ने की आशंका जताई है। संगठनों का कहना है कि नवरात्र, दशहरा, दिवाली और छठ जैसे त्योहारों के दौरान बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ती है। ऐसे में सड़क जाम, रास्तों पर रोक और बाजारों तक पहुंचने में परेशानी से व्यापारियों, कर्मचारियों और छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी प्रभावित हो सकती है।
व्यापारिक संगठनों ने 12 और 13 अक्तूबर को राहुल गांधी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। कई संगठनों ने राहुल गांधी से एसआईआर के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों के समय और तरीके पर फिर से विचार करने को कहा है। वहीं, कुछ संगठनों ने केंद्र सरकार और न्यायपालिका से ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की है, जिससे विरोध का अधिकार बना रहे, लेकिन आम लोगों और कारोबारियों का कामकाज न रुके।
व्यापारियों ने राहुल गांधी से क्या मांग की?
भारतीय उद्योग व्यापार मंडल की दिल्ली प्रदेश इकाई ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर बाजारों में डर और अनिश्चितता का माहौल बनने की आशंका जताई। संगठन के अध्यक्ष नवीन गर्ग ने कहा कि त्योहारों का समय करोड़ों व्यापारियों, कर्मचारियों और उनके परिवारों की कमाई के लिए अहम है। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल ने भी कहा कि राजनीतिक मतभेदों का आर्थिक बोझ व्यापारियों पर नहीं पड़ना चाहिए। फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया ने राहुल गांधी से त्योहारों के दौरान सड़क पर होने वाले विरोध को रोककर बातचीत और कानूनी रास्ते अपनाने की अपील की।
क्या दिल्ली के बाजारों में कारोबार प्रभावित होने का दावा है?
जयपुर व्यापार महासंघ ने 12 अक्तूबर को राहुल गांधी को पत्र लिखकर विरोध प्रदर्शनों से छोटे दुकानदारों और कर्मचारियों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका जताई। अगले दिन संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य न्यायाधीश को भी पत्र भेजा। दिल्ली के कई बाजार और औद्योगिक संगठनों ने भी बाजार बंद कराने, सड़क जाम होने और सामान की आवाजाही रुकने से बचाने के लिए कदम उठाने की मांग की। खान मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव मेहरा ने दावा किया कि पुलिस बैरिकेडिंग के कारण ग्राहकों को बाजार तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। उनके मुताबिक, कारोबार सामान्य स्तर के 10 से 20 प्रतिशत तक रह गया है।
सुप्रीम कोर्ट से व्यापारिक संगठनों ने क्या अपील की?
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन ने 12 अक्तूबर को मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर व्यावसायिक इलाकों में प्रदर्शन से होने वाली परेशानियों पर हस्तक्षेप मांगा। संगठन ने बाजारों तक पहुंचने वाले प्रमुख रास्ते खुलवाने और व्यावसायिक क्षेत्रों से दूर तय स्थानों पर प्रदर्शन कराने के निर्देश देने की अपील की। बंगलूरू होलसेल क्लॉथ मर्चेंट्स एसोसिएशन ने भी कहा कि त्योहारों के लिए माल खरीदने वाले छोटे व्यापारियों को कारोबार रुकने से नुकसान हो सकता है। महिला व्यापार महासंघ संस्थान ने महिला उद्यमियों, कारीगरों और छोटे कारोबारियों के हितों की रक्षा की मांग की।
क्या विरोध के अधिकार और कारोबार के बीच संतुलन जरूरी है?
केरलम के कालीकट चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री समेत कई संगठनों ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इससे बाजारों, परिवहन और सामान की आवाजाही में बाधा नहीं आनी चाहिए। नरेला फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन और दाल व बेसन मिलर्स एसोसिएशन ने भी औद्योगिक इकाइयों और आपूर्ति व्यवस्था की सुरक्षा की मांग की। एसआईआर के विरोध में विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका देकर एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाने और इसकी जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति बनाने की मांग भी की है। हालांकि, व्यापारिक संगठनों ने नुकसान के जो दावे किए हैं, उनके आर्थिक प्रभाव को बताने वाले स्वतंत्र रूप से सत्यापित आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।