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CBI: बैंक धोखाधड़ी मामले में सीबीआई ने की कार्रवाई, पुणे बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड और प्रमोटर्स के खिलाफ दर्ज की एफआईआर

Sun, 19 Jun 2022 08:24 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुम्बई

सार

सीबीआई ने 2013 से 2016 के दौरान पंजाब नेशनल बैंक में 30 करोड़ रुपये की कथित बैंक धोखाधड़ी के मामले में पुणे बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
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सीबीआई - फोटो : फाइल
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विस्तार
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सीबीआई ने 2013 से 2016 के दौरान पंजाब नेशनल बैंक में 30 करोड़ रुपये की कथित बैंक धोखाधड़ी के मामले में पुणे बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इस मामले में सीबीआई की टीम ने  रविवार को मुंबई में तीन स्थानों पर तलाशी ली। सीबीआई के अधिकारियों ने रविवार को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस मामले में मुंबई में प्रमोटर्स इशाक युसूफ बलवा और जवर्धन विनोद गोयनका और पुणे बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड के परिसरों पर छापेमारी की गई।

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गौरतलब है कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में डायनामिक्स बलवास समूह को सीबीआई जांच का सामना करना पड़ा था, लेकिन सभी आरोपियों को एक विशेष अदालत ने बरी कर दिया था। ताजा मामला पुणे बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड से संबंधित है, जिसे 1997 में पांच सितारा होटल और रिसॉर्ट बनाने के लिए स्थापित किया गया था। कंपनी डीबी हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड के पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।

पंजाब नेशनल बैंक ने अपनी शिकायत में कहा था कि पुणे बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड जिसे पहले डायनामिक्स बलवास रिजॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड के नाम से जाना जाता था। इसने पुणे के यरवदा में एक पांच सितारा होटल की योजना बनाई थी। इस पांच सितारा होटल को पीएनबी (102 करोड़ रुपये) और इलाहाबाद बैंक (अब इंडियन बैंक) (102 करोड़ रुपये) द्वारा वित्तपोषित किया गया था। 
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बैंक ने कंपनी पर आरोप लगाया था कि तब कंपनी ने कहा कि पुणे नगर निगम से मंजूरी प्राप्त करने में देरी के कारण परियोजना में देरी हुई है। बैंक के आरोप के मुताबिक, कंपनी के प्रमोटर भी टू जी स्पेक्ट्रम मामले में कथित रूप से शामिल थे। इसके बाद संवितरण बैंक द्वारा रोक दिया गया था। 2011 से कोई निर्माण गतिविधि प्रगति पर नहीं है। पीएनबी ने 2011 तक 30.50 करोड़ रुपये का वितरण किया था, जिसके बाद आगे वितरण रोक दिया गया था।

इसके बाद परियोजना को रद्द कर दिया गया और बाद में इसे एक आवासीय टावर परियोजना में परिवर्तित कर दिया गया। जिसके लिए कंपनी ने 2013 में बैंक ऑफ इंडिया से संपर्क किया और ऋण जारी किए गए। तब पीएनबी ने इस मामले में कोई अतिरिक्त एक्सपोजर नहीं लेते हुए आवासीय भवन के लिए पुराने खाते को समायोजित कर दिया। 2016 में खाता फिर से गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) में बदल गया। बैंक ने तब खाते को धोखाधड़ी घोषित कर दिया और सीबीआई में शिकायत कर दी। जिसके बाद सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की है।

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