कंपनी ने कथित तौर पर दिसंबर 2011 और फरवरी 2012 के बीच बैंक से 25 लाख रुपये के 28 ऋण पत्र जारी किए। ये शेल कंपनियों द्वारा हस्तांतरित किए गए थे। इससे यह पता चलता है कि बेईमानी के इरादे से धन का दुरुपयोग व्यवस्थित और योजनाबद्ध तरीके से किया गया था।
सीबीआई ने मुंबई स्थित कंपनी पीएएल ट्रेडिंग के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने पीएएल ट्रेडिंग पर कथित तौर पर 17 फर्जी कंपनियों के जरिए एसबीआई से उधार लिए गए पैसे की हेराफेरी करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है। जांच एजेंसी के अधिकारियों ने बताया कि कंपनी की इस हेराफेरी के कारण बैंक को 24 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। ये कंपनी कपड़े का कारोबार करती है।
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जांच एजेंसी के अधिकारियों ने बताया कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की शिकायत पर कंपनी और उसके निदेशकों रिंकू पटोदिया और अनीता पटोदिया के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इस एफआईआर में कंपनी के फोरेंसिक ऑडिट के दौरान पता चली कार्यप्रणाली का विवरण दिया गया है। जानकारी के मुताबिक, बैंक ने 2007 में गोरेगांव पूर्व स्थित कंपनी को 22 करोड़ रुपये का ऋण दिया था। जिसके कारण 27 दिसंबर, 2012 को गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों की तारीख में 24.20 करोड़ रुपये का बकाया हो गया। जब कंपनी का फोरेंसिक ऑडिट किया गया तो पता चला कि यह सामने आया कि कंपनी ने 17 शेल कंपनियों का उपयोग करके पाटोदिया के रिश्तेदारों की रियल एस्टेट कंपनियों में ऋण राशि का दुरुपयोग किया और उसे डायवर्ट कर दिया।
यह भी बताया गया है कि कंपनी ने कथित तौर पर दिसंबर 2011 और फरवरी 2012 के बीच बैंक से 25 लाख रुपये के 28 ऋण पत्र जारी किए। ये शेल कंपनियों द्वारा हस्तांतरित किए गए थे। इससे यह पता चलता है कि बेईमानी के इरादे से धन का दुरुपयोग व्यवस्थित और योजनाबद्ध तरीके से किया गया था।
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एफआईआर में यह आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने अन्य बैंकों, आईसीआईसीआई बैंक के साथ खाते खोले थे, जिसके माध्यम से उसने स्टेट बैंक को गलत जानकारी देते हुए अपनी बिक्री आय को क्रेडिट और डेबिट करना शुरू कर दिया था। इसमें यह भी कहा गया है कि कंपनी ने कहा था कि वह नकदी संकट का सामना कर रही है। उसे ओवरड्राइंग की आवश्यकता है। सीबीआई ने आरोप लगाया कि धन की प्रणालीगत हेराफेरी और बैंक को यह गलत जानकारी देना कि वह नकदी संकट का सामना कर रहा है, कंपनी और उसके प्रबंधन की ओर से बेईमान इरादे को दर्शाता है।