पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम की सीबीआई से दूर भागने की तमाम कोशिशें आखिरकार नाकाम रहीं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें बुधवार को दिल्ली के सीबीआई मुख्यालय में पेश होना पड़ा। सीबीआई ने आठ घंटे की पूछताछ में उनसे 100 सवाल पूछे।
एनआईएक्स मीडिया कंपनी को विदेशी निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (एफआईपीबी) की तरफ से दी गई छूट में कार्ति केरोल के संबंध में उनसे दिन भर पूछताछ हुई। आईएनएक्स को जब छूट मिली तो कार्ति के पिता पी. चिदंबरम वित्त मंत्री थे। आरोप है पिता के वित्त मंत्री होने की वजह से इस कंपनी को नियम से परे जा कर छूट दी गई।
इस मामले में 15 मई को दायर एफआईआर के बाद कार्ति को सीबीआई ने कई बार समन किया। लेकिन कार्ति पेश नहीं हुए। इनके विदेश भाग जाने केअंदेशे पर सीबीआई ने कार्ति के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी कर दिया।
कार्ति इस नोटिस के खिलाफ मद्रास हाई कोर्ट चले गए हाई कोर्ट ने लुक आउट नोटिस पर अंतरिम रोक लगा दी। इस पर सीबीआई सुप्रीम कोर्ट पहुंची। सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस को फिर से बहाल कर दिया और कार्ति को सीबीआई के सामने पेश होने का आदेश दे दिया।
सीबीआई ने अपनी एफआईआर में कार्ति चिदंबरम, उनकी कंपनी चेस मैनेजमेंट सर्विसेज, आईएनएक्स मीडिया, एडवांटेज स्ट्रेटजिक कंसल्टिंग सर्विसेज, इसके निदेशक पद्मा विश्वनाथन को आरोपी बनाया है। साथ ही आईएनएक्स के निदेशक पीटर मुखर्जी और इंद्राणी मुखर्जी को भी आरोपी बनाया गया है। पीटर और इंद्राणी फिलहाल अपनी बेटी की हत्या के मामले में जेल में हैं।
सीबीआई ने अपनी जांच में पाया कि आईएनएक्स ने एडवांटेज कंसलटेंसी को एफआईपीबी की हरी झंडी दिलवाने के लिए 10 लाख रुपये का भुगतान किया। एजेंसी का दावा है कि एडवांटेज कंसलटेंसी परोक्ष तौर पर कार्ति की ही कंपनी है। सीबीआई के मुताबिक जांच मेंं यह भी पाया गया है कि आईएनएक्स और अन्य कंपनियों को 3.5 करोड़ का भुगतान हुआ। इन अन्य कंपनियों में कार्ति की हिस्सेदारी है।