केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) ने रिश्वतखोरी के एक मामले में नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे के मुख्य इलेक्ट्रिकल इंजीनियर वीके उपाध्याय को गिरफ्तार किया है और अपनी छापेमारी के दौरान 2.19 करोड़ रुपये नकद बरामद किए हैं। सीबीआई अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि पहले इस मामले में उपाध्याय के डिप्टी रंजीत कुमार बोरा को कथित तौर पर 15 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था।
एजेंसी ने मंगलवार को गुवाहाटी, पटना और नोएडा समेत नौ जगहों पर आरोपी के परिसरों पर छापेमारी की थी। इस दौरान सीबीआई ने 2.19 करोड़ रुपये की नकदी और कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए थे। सीबीआई के प्रवक्ता आरसी जोशी ने इसे लेकर बताया कि इसमें से लगभग 2.13 करोड़ रुपये की नकदी और नोएडा में तीन फ्लैट की जानकारी उपाध्याय के परिसरों से बरामद की गई थी।
बोरा के परिसरों पर छापेमारी में मिले छह लाख नकद और फ्लैट की जानकारियां
उन्होंने कहा कि बोरा के परिसरों पर खोजबीन के दौरान एजेंसी ने करीब छह लाख रुपये नकद बरामद किए और छह फ्लैट की जानकारी प्राप्त की। ये फ्लैट बोरा और उसके परिजनों के नाम पर हैं और इनमें से एक फ्लैट गुवाहाटी में भी है। सीबीआई प्रवक्ता ने बताया कि आरोप है कि बोरा नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे की परियोजनाओं में पटना की एक कंपनी सन शाइन डिवाइस प्राइवेट लिमिटेड का पक्ष ले रहे थे।
मामले में सीबीआई तीन को पहले ही कर चुकी गिरफ्तार, उपाध्याय तीसरे आरोपी
जोशी ने कहा कि मामले में एफआईआर दर्ज करने के बाद सीबीआई ने तब छापेमारी की थी जब कंपनी के निदेशक चिंतन जैन का एक कर्मचारी नीरज जैन बोरा को रिश्वत का पैसा दे रहा था। इसके बाद सीबीआई ने बोरा, जैन और नीरज कुमार को गिरफ्तार कर लिया था। जांच के दौरान सामने आया कि इस मामले में वीके उपाध्याय की भूमिका भी थी। इसके बाद उपाध्याय को हिरासत में लिया गया था।
कंपनी से मिले थे बोरा को फ्लैट, इसके बदले मांगी थी 2.10 करोड़ रुपये की रिश्वत
आरोप है कि बोरा को उसके काम के बदले कंपनी ने दो बेनामी संपत्तियां दी थीं। इसके साथ ही सीबीआई ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने जैन को पूर्व में अनुचित लाभ देने और भविष्य में भी इसी तरह की मदद का वादा करने के एवज में फ्लैट के बदले 2.10 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी। जोशी ने बताया कि इस मामले में सीबीआई पूरी सक्रियता से जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।