विमान हादसे की जांच के लिए ब्लैक बॉक्स महत्वपूर्ण
किसी भी विमान हादसे की जांच के लिए ब्लैक बॉक्स को महत्वपूर्ण माना जाता है जो महत्वपूर्ण डाटा को संरक्षित रखता है। हालांकि विमानन क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि विमान के ब्लैक बॉक्स को डिकोड करने में ही महीनों लग सकते हैं।
अहमदाबाद विमान हादसे के बाद की स्थिति; विमान हादसे के दौरान की तस्वीर (दाएं ऊपर)
- फोटो : PTI
क्या होता है ब्लैक बॉक्स
विमान के इस महत्वपूर्ण अंग का नाम भले ही ब्लैक बॉक्स हो लेकिन यह दो हिस्सों में बंटा हुआ चमकीले नारंगी रंग का उपकरण होता है जो विमान क्रैश होने पर भी नष्ट नहीं होता। इसे अत्यंत चरम परिस्थितियों में भी सुरक्षित रहने के हिसाब से डिजाइन किया जाता है इसलिए आग, पानी आदि से भी यह खराब नहीं होता। ब्लैक बॉक्स का एक हिस्सा है फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर (एफडीआर)। इसमें उड़ान के दौरान हजारों आंकड़े जमा होते रहते हैं। इनमें विमान की गति, ईंजन की कार्यकुशलता, विमान की दिशा, ईंजन पर नियंत्रण की स्थिति आदि से संबंधित आंकड़े जमा होते रहते हैं। वहीं दूसरा महत्वपूर्ण अंग है कॉकपिट वाइट रिकॉर्डर (सीवीआर)। इसमें कॉकपिट में दोनों पायलटों के बीच होने वाली सारी बातचीत से लेकर पायलट एटीसी से जो बातें करते हैं वह सारी रिकॉर्ड होती है। इसके अलावा इसमें रेडियो संदेश और मैकेनिकल साउंड भी रिकॉर्ड होता है।
यह देखते हुए कि एअर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान उड़ान भरने के दौरान ज्यादा ऊपर उठने के लिए संघर्ष करता रहा और पायलटों ने आपात संदेश एटीसी को भेजा, एफडीआर की जांच से इंजन में आने वाली किसी भी खराबी और सिस्टम की ओर से दी गई किसी भी चेतावनी के बारे में पता चल सकता है। वहीं सीवीआर में उड़ान भरने के साथ ही आई खराबी के बाद कॉकपिट में हुई बातचीत रिकॉर्ड हुई हो सकती है।
कैसे डिकोड होता है ब्लैक बॉक्स
एक बार विमान के मलबे से ब्लैक बॉक्स के दोनों हिस्से बरामद होने के बाद उनकी विशेषज्ञ फोरेंसिक प्रयोगशाला में जांच होती है। यह जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो(एएआईबी) की प्रयोगशालाओं या किसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसी की प्रयोगशाला में होती है। जांचकर्ता पहले उपकरण की भौतिक स्थिति का आकलन करते हैं और यदि उपकरण को किसी तरह की क्षति पहुंची होती है तो उसकी मेमोरी को संरक्षित करने का प्रयास किया जाता है। जांच की प्रक्रिया के तहता उपकरण के डाटा को रडार और एटीसी के डाटा से मिलान किया जाता है। आधुनिक जांच टीमें एफडीआर डाटा के आधार पर विमान के प्रक्षेपपथ और सिस्टम की विफलता का एक 3डी कंप्यूटर सिमूलेशन तैयार करती हैं।
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लैंडिंग गियर की खराबी क्यों आई
अहमदाबाद हादसे में एविएशन सेफ्टी सलाहकार एंथनी बिक्रहाउस ने क्रैश के वीडियो फुटेज का अध्ययन कर यह बात रेखांकित की है कि जब विमान के लैंडिंग गियर को अपने आप को समेट लेना चाहिए था, यह तब भी नीचे की ओर झूल रहा था। ब्लैक बॉक्स डाटा से यह पता चल सकता है कि ऐसा क्यों हुआ।
कब तक आएगी रिपोर्ट
ब्लैक बॉक्स का शुरुआती डाटा हासिल करने में ही महीना भर लग सकता है। हालांकि यदि उपकरण को आग के कारण कुछ नुकसान हुआ होगा तो यह समय और लंबा हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन का नियम है कि शुरुआती जांच रिपोर्ट 30 दिन के अंदर आ जानी चाहिए लेकिन समग्र विश्लेषण में और ज्यादा समय लग सकता है। विमानन विशेषज्ञ ग्रेग फेथ कहते हैं, उपकरण से डाटा जल्द निकाला जा सकता है लेकिन उसके विश्लेषण में समय लगता है। इसके कारण अंतिम रिपोर्ट आने में 12 से 24 महीने तक लग सकते हैं।
वीडियो से मिलेगी जांच में मदद...दोनों इंजनों का फेल होना हो सकती है वजह
विशेषज्ञों का कहना है कि दुर्घटना का जो वीडियो आया है, उससे जांच में काफी मदद मिल सकती है। इससे लगता है कि विमान ऊपर उठ रहा है लेकिन उसकी नोज नीचे और टेल झुकी हुई है। पायलट ने विमान को ऊपर उठाने की कोशिश की, लेकिन वह नीचे ही गिरता गया। आशंका है कि विमान के दोनों इंजन फेल हो गए हों। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों इंजनों का एकसाथ फेल होना बेहद दुर्लभ होता है।
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