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Caste Consciousness: शशि थरूर बोले- 1950 के दशक की तुलना में आज भारतीय समाज जाति के प्रति ज्यादा जागरूक

Sat, 12 Nov 2022 05:30 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

'अंबेडकर की खोई हुई विरासत' विषय पर चर्चा के दौरान थरूर ने कहा, "अब हर जाति अपनी पहचान के प्रति सचेत है और यह पहचान का लेबल राजनीतिक लामबंदी के लिए एक प्रतीक बन गया है।"
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कांग्रेस सांसद शशि थरूर । - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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आजादी के बाद के दशक की तुलना में आज भारतीय समाज में जाति के प्रति ज्यादा जागरूकता है। यह बात कांग्रेस सांसद और लेखक शशि थरूर ने 'टाटा लिटरेचर फेस्विल' के दौरान कही। 

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'अंबेडकर की खोई हुई विरासत' विषय पर चर्चा के दौरान थरूर ने कहा, "अब हर जाति अपनी पहचान के प्रति सचेत है और यह पहचान का लेबल राजनीतिक लामबंदी के लिए एक प्रतीक बन गया है।"  कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पुस्तक 'अंबेडकर: अ लाइफ' (डॉ. बी. आर. अंबेडकर की जीवनी) का विमोचन किया। 

थरूर ने आगे कहा कि अंबेडकर जाति व्यवस्था को पूरी तरह से नष्ट करना चाहते थे। उन्होंने कहा कि जाति व्यवस्था, राजनीतिक दलों में बहुत ज्यादा व्याप्त है। चर्चा के दौरान श्रोताओं के सवाल के जवाब में कांग्रेस सांसद ने कहा कि जो राजनीतिक दल भेदभाव या छुआछूत के खिलाफ हैं, वे भी जाति के नाम पर वोट मांगते हैं। उन्होंने आगे कहा कि जाति व्यवस्था खत्म होने से बहुत दूर है। 
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तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर ने कहा कि अंबेडकर और जवाहर लाल नेहरू दोनों चाहते थे कि जाति व्यवस्था भारत से गायब हो जाए। नेहरू ने सोचा था कि आधुनिकीकरण के साथ यह खत्म हो जाएगी। उन्होंने आगे कहा, अंबेडकर ने जाति के उन्मूलन की लड़ाई लड़ी, क्योंकि उन्हें लगता था कि जब तक जाति व्यवस्था की चेतना मौजूद रहेगी, दमन भी मौजूद रहेगा। 

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