केंद्रीय विभागों में नियुक्ति पाने वाले अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए राहत वाली खबर है। उनकी नियुक्ति में अब जाति प्रमाणपत्र बाधा नहीं बनेगा।
अगर प्रमाणपत्र नहीं है तो उन्हें तत्काल अस्थायी नियुक्ति दी जाएगी और प्रमाणपत्र जारी होने के बाद उन्हें स्थायी कर दिया जाएगा। ऐसे में नियुक्ति के लिए अभ्यर्थियों को न लंबा इंतजार करना होगा और न ही प्रमाणपत्र के लिए तहसीलों के चक्कर लगाने होंगे।
प्रमाणपत्र के लिए अभ्यर्थी की ओर से आवेदन किए जाने के बाद उसे प्राप्त करने की जिम्मेदारी विभाग के नियुक्ति प्राधिकारी की होगी। इस बाबत केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने आवश्यक दिशानिर्देश जारी किए हैं।
डीओपीटी ने राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को भी सलाह दी है कि समय से जाति प्रमाणपत्र न देने या गलत प्रमाणपत्र देने वाले अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। डीओपीटी का मानना है कि कुछ मामलों में लोग गलत सर्टिफिकेट पर अस्थायी नियुक्ति पा जाते हैं।