केंद्र सरकार द्वारा आनन फानन में नोट बैन करने के फैसले के बाद हर तरफ अफरातफरी का माहौल है, बैंकों के बाहर लंबी लाइन लगी हैं तो रोजाना नौकरी के लिए घर से निकलने वाले लोग भी परेशान हैं। किसी को बस का टिकट लेने के लिए जूझना पड़ रहा है तो कोई ऑटो-टैक्सी वालों को समझाने में मशक्कत कर रहा है।
रोजमर्रा की जरूरत के सामान के लिए भी लोग नकद से ज्यादा उधारी के भरोसे हैं तो बड़े बाजारों में सुस्ती का आलम है। हालांकि कालाधन खत्म करने के सरकार के इस निर्णय को आम जनता ने सकारात्मक नजरिए से ही लिया है जिससे सरकार और उसके कारिंदे भी उत्साहित हैं।
बावजूद इसके रह रहकर एक सवाल लगातार उठ रहा है कि सरकार ने इतना बड़ा कदम बिना मुकम्मल तैयारियों के यानि आधी अधूरी तैयारियों के साथ ही उठा लिया। क्या सरकार इतने बड़े निर्णय को करने से पहले थोड़ा और तैयारियां नहीं कर सकती थी?
जिससे आम जनता को होने वाली इस मुसीबत से कुछ राहत मिल पाती। सरकार कुछ और पुख्ता कदम उठाकर या जनता को थोड़ा समय देकर भी इस निर्णय को लागू कर सकती थी जिससे आम आदमी को थोड़ा संभलने का मौका मिल जाता।