2. सीपीसी कैंटीन में जीएसटी पर 50 प्रतिशत छूट
3. आर्मी की तर्ज पर राज्यों एवं जिला स्तर पर कल्याण बोर्ड
4. आर्मी की तरह सीएपीएफ के रिटायर्ड जवानों को एक्स सर्विसमैन स्टेटस
5. आर्मी की तर्ज पर सीएपीएफ में वन रैंक वन पेंशन
6. सेना की तरह सीएपीएफ में पैरामिलिट्री स्पेशल पे
7. सेना की तर्ज पर सीएपीएफ में शहीद का दर्जा एवं दूसरे फायदे
8. सीसीएस की जगह पैरामिलिट्री सर्विस रूल्स
9. एक जिले में कम से कम एक सीजीएचएस डिस्पेंसरी
10. सेना की तर्ज पर अर्धसैनिक झंडा दिवस
11. सेना की तरह अर्धसैनिक स्कूल
12. ओजीएएस/एनएफएफयू लागू करना
13. डीजी के पद पर कैडर अफसरों की नियुक्ति
14. बाकी बलों की तर्ज पर CISF में भी सीएलएमएस लागू करें
15. सीआईएसएफ में 60 दिन का सालाना अवकाश
पुरानी पेंशन पर मिली जीत, हार में बदली
एसोसिएशन के चेयरमैन एवं पूर्व एडीजी सीआरपीएफ एचआर सिंह और महासचिव रणबीर सिंह के मुताबिक, दिल्ली उच्च न्यायालय ने 11 जनवरी को दिए अपने एक फैसले में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों 'सीएपीएफ' को 'भारत संघ के सशस्त्र बल' माना है। इन बलों में लागू एनपीएस को स्ट्राइक डाउन करने की बात कही गई है। अदालत ने अपने फैसले में कहा था, चाहे कोई आज इन बलों में भर्ती हुआ हो, पहले कभी भर्ती हुआ हो या आने वाले समय में भर्ती होगा, सभी जवान और अधिकारी, पुरानी पेंशन स्कीम के दायरे में आएंगे। केंद्र ने इस फैसले को भी लागू नहीं किया।
केंद्र सरकार ने उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में स्टे ले लिया है। इन बलों की दूसरी मांगों पर भी विचार नहीं किया जा रहा। यह आंदोलन अब नहीं थमेगा, बल्कि इसकी रफ्तार और तेज होती जाएगी। 25 सितंबर को होने वाली रैली में देश के विभिन्न हिस्सों से रिटायर्ड अर्धसैनिक जंतर-मंतर पर आवाज बुलंद करेंगे।
ओपीएस लागू नहीं करने को लेकर नाराजगी
गत फरवरी में जंतर मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने सीएपीएफ में ओपीएस लागू नहीं करने को लेकर नाराजगी जाहिर की थी। पदाधिकारियों ने उस वक्त कहा था कि कोई खिलाड़ी ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीत कर आता है तो उसे केंद्र सरकार पांच करोड़ रुपये देती है। राज्य सरकार भी दो करोड़ रुपये दे देती है। एक प्लाट भी मिलता है और दूसरी कई सुविधाओं का अंबार लगता है। जिसे ये सब मिलता है, वह एक जिंदा व्यक्ति है। दूसरी तरफ सीएपीएफ के जवान को देखें, वह देश के लिए शहीद हो जाता है। वह दोबारा से जीवन में नहीं आ सकता। सरकार उसके मां बाप को एक तय राशि देकर राम-राम बोल देती है।
सीएपीएफ के लिए न तो अर्ध सैनिक कल्याण बोर्ड हैं और न ही अर्ध सेना झंडा दिवस कोष स्थापित किया गया है। इनके बच्चों के लिए अर्धसैनिक स्कूल भी नहीं हैं। सीपीसी कैंटीन को जीएसटी से छूट नहीं मिलती। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि देश में 12 लाख सर्विंग कर्मियों के अलावा आठ लाख रिटायर्ड पर्सन हैं। इनके परिवार भी हैं। सरकार को ध्यान में रखना चाहिए कि कई बार महज एक प्रतिशत वोटों के अंतर से सत्ता इधर-उधर हो जाती है।
15 साल में मुश्किल से पहली पदोन्नति
सीआरपीएफ के एक्स सहायक कमांडेंट सर्वेश त्रिपाठी ने कहा, बल के 40 जवानों ने पुलवामा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। सीएपीएफ को तो रोजाना ही आतंकियों और नक्सलियों से लड़ना पड़ रहा है। कभी कश्मीर में तो कभी नक्सल प्रभावित इलाकों में ऑपरेशन को अंजाम देना पड़ता है। वे अपने परिवार को किसके भरोसे छोड़कर जाते हैं। सीआरपीएफ के एक जांबाज अफसर नितिन भालेराव, जो 2020 में शहीद हुए थे, बाद में उनकी पत्नी का निधन हो गया था। परिवार में उनकी आठ वर्षीय बेटी बची है। उनकी मदद के लिए कुछ नहीं हो रहा। उसकी जिम्मेदारी लेने के लिए कोई तैयार नहीं है। ऐसे मामले में न तो कोई कल्याण बोर्ड है और न ही ऐसा कोई मेकेनिज्म है, जो कल्याण पर ध्यान दे सके। जीएसटी कंटीन पर छूट नहीं मिलती। 'ओजीएएस' यानी संगठित कैडर का फैसला सुप्रीम कोर्ट से हो चुका है। सरकार ने कैबिनेट की बैठक के बाद उसकी घोषणा कर दी। 2019 के लोकसभा चुनाव के घोषणा पत्र में भी यह मुद्दा शामिल था। मगर अभी तक कुछ नहीं हो सका। उसे लागू नहीं किया जा रहा है। दूसरी ओर सीएपीएफ के युवा अफसर जॉब छोड़ रहे हैं। उनकी एक बड़ी दिक्कत पदोन्नति को लेकर है। 15 साल में मुश्किल से पहली पदोन्नति मिल पाती है। एनएफएफयू का फायदा भी सभी को नहीं मिल रहा। अब यह आंदोलन थमेगा नहीं। इस चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। केंद्र सरकार को सीएपीएफ बलों की लंबित मांगों को पूरा करना होगा।