कनाडा का 300 सदस्यीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल आज भारत पहुंचेगा। तीन दशक से अधिक समय में यह कनाडा का सबसे बड़ा व्यापार मिशन है। दोनों देश विमानन, कृषि और स्वच्छ तकनीक जैसे क्षेत्रों में कारोबार व निवेश बढ़ाना चाहते हैं। साथ ही, 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुने से ज्यादा करने का लक्ष्य है। ऐसे में क्या इस दौरे से आर्थिक साझेदारी समझौते की बातचीत को भी रफ्तार मिलेगी? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
कनाडा का 300 सदस्यीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल सोमवार को भारत पहुंचेगा। तीन दशक से अधिक समय में यह कनाडा का सबसे बड़ा व्यापार मिशन है।
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इसका उद्देश्य दोनों देशों के व्यापारिक संबंध मजबूत करना और 2030 तक द्विपक्षीय कारोबार को दोगुने से अधिक स्तर पर पहुंचाना है। कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल 12 से 17 अक्तूबर तक मुंबई और बंगलूरू का दौरा करेगा। सिद्धू ने कहा कि विमानन, कृषि एवं खाद्य उत्पादों और स्वच्छ प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कनाडा की विशेषज्ञता को भारत की बढ़ती मांग से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। इससे व्यापार में विविधता आएगी और नए निवेश आकर्षित होंगे।
यह कारोबारी दल ऐसे समय में आ रहा है, जब भारत और कनाडा इस वर्ष के अंत तक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) पर बातचीत पूरी करने की दिशा में काम कर रहे हैं। समझौते पर पांचवें दौर की वार्ता पांच से नौ अक्तूबर तक ओटावा में हुई थी।
यह व्यापारिक मिशन क्यों अहम है?
कनाडा भारत की बढ़ती मांग के साथ अपनी विशेषज्ञता का मिलान करना चाहता है। इसमें विमानन, कृषि-खाद्य और स्वच्छ प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्र शामिल हैं। सिद्धू ने कहा कि इससे व्यापार में विविधता आएगी और नया निवेश आकर्षित होगा। यह अभियान दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है। यह कनाडाई कारोबारियों को भारतीय निर्णय लेने वालों, उद्योग जगत के नेताओं और संभावित ग्राहकों से जोड़ेगा।
व्यापार समझौते पर क्या प्रगति हुई है?
सिद्धू ने 1 अक्तूबर को अमेरिका के मिल्वौकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के दौरान वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की। दोनों मंत्रियों ने वार्ता में हुई प्रगति पर चर्चा की। उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को गहरा करने के प्रयासों पर भी बात की। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की मार्च में भारत यात्रा के दौरान एक व्यापक व्यापार समझौते पर जोर दिया गया था। तब 2030 तक दोतरफा व्यापार को 70 अरब कैनेडियन डॉलर (करीब 4.75 लाख करोड़ रुपये) तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया था।