सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जम्मू-कश्मीर को संविधान के अनुच्छेद-370 के तहत मिला विशेष दर्जा क्या वापस मिल सकता है? क्या 5 अगस्त, 2019 के पहले की स्थिति बहाल हो सकती है? इनके जवाब कोर्ट के आदेश व संविधान में मौजूद है। प्रथमदृष्टया कहा जा सकता है कि यह अब संभव नहीं है। इसे यूं समझिए...
बदलाव की प्रक्रिया यूं हुई शुरू
5 अगस्त, 2019 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सांविधानिक आदेश 272 जारी किया। इसमें अनुच्छेद-367 में संशोधन किया गया था। अनुच्छेद-370 (3) में संविधान सभा को विधानसभा से बदला गया। तब जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन था। विधानसभा की शक्तियां राज्यपाल के हाथों में थी और राज्यपाल की ओर से देश की संसद जम्मू-कश्मीर के लिए कानून बना सकती थी। सांविधानिक आदेश के कुछ घंटे बाद ही राज्यसभा ने अनुच्छेद-370 (3) के तहत राष्ट्रपति को सिफारिश कर दी कि अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को प्रभावी न रखा जाए। जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019 राज्यसभा में पारित हो गया।
6 अगस्त को लोकसभा की कार्यवाही
संसद ने जम्मू-कश्मीर की विधानसभा के तौर पर विधायी काम किए। लोकसभा ने अनुच्छेद-370 (3) के तहत राष्ट्रपति को सिफारिश में कहा, अनुच्छेद-370 के विशेष प्रावधान प्रभावी न रखे जाएं। उसने पुनर्गठन विधेयक भी पारित कर दिया। वहीं, राष्ट्रपति ने 6 अगस्त को सांविधानिक आदेश 273 जारी किया। इसमें जम्मू-कश्मीर के लिए अनुच्छेद-370 के प्रावधान प्रभावी न रखने की सिफारिश मान ली गई।
इतनी मुश्किल कि असंभव
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति के सांविधानिक आदेश 273 को वैध माना है। अब अनुच्छेद-370 की वापसी के लिए सरकार को संविधान संशोधन के लिए अनुच्छेद-368 का उपयोग करना होगा। यह संशोधन तभी पारित होगा जब संसद में दो-तिहाई विशेष बहुमत हो। दोनों सदनों को मिलाकर 50 फीसदी सदस्यों की सहमति हो। सबसे अहम, राज्यों की विधानसभाओं में से 50 फीसदी सहमति हो। इसलिए अनुच्छेद-370 की वापसी असंभव-सी दिखती है।
टाइम लाइन
- 20 दिसंबर, 2018: जम्मू-कश्मीर में संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति शासन लगाया गया। इसे 3 जुलाई 2019 तक बढ़ाया गया।
- 5 अगस्त, 2019: केंद्र ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त कर दिया।
- 6 अगस्त, 2019: अनुच्छेद 370 को रद्द करने के राष्ट्रपति के आदेश को चुनौती देने वाली पहली याचिका वकील एमएल शर्मा द्वारा दायर की गई।
- 10 अगस्त, 2019: नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) ने याचिका दायर कर कहा कि राज्य की स्थिति में लाए गए बदलावों ने इसके नागरिकों के अधिकारों को छीन लिया है।
- 24 अगस्त, 2019: प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने सूचना के संचार पर प्रतिबंध के केंद्र व जम्मू-कश्मीर प्रशासन के फैसले का समर्थन करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
- 28 अगस्त, 2019: सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकारों पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने के लिए दायर याचिका पर केंद्र और जम्म-कश्मीर प्रशासन को नोटिस जारी किया।
- 28 अगस्त, 2019: तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले को पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ को भेजा।
- 19 सितंबर, 2019: सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ का गठन किया।
- 2 मार्च, 2020: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के फैसले की सांविधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सात न्यायाधीशों की बड़ी पीठ के पास भेजने से इन्कार किया।
- 11 जुलाई, 2023: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 2 अगस्त से दैनिक सुनवाई शुरू करेगा।
- 2 अगस्त, 2023: सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई शुरू की।
- 5 सितंबर, 2023: कोर्ट ने मामले में 23 याचिकाओं पर 16 दिनों तक सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।
- 11 दिसंबर, 2023: सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के सरकार के फैसले को बरकरार रखा... साथ ही कहा, अगले साल 30 सितंबर तक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव कराने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए।