सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बच्चों की कस्टडी के लिए पुनर्विवाह आधार नहीं हो सकता। वह भी तब जब तलाक के वक्त पति-पत्नी के बीच इसे लेकर करार हो गया हो। न्यायमूर्ति कूरियन जोसफ और संजय किशन कौल ने कहा, सिर्फ पति के दूसरी शादी करने के आधार पर उसे बच्चों की कस्टडी से महरूम नहीं किया जा सकता। वह भी खासतौर पर तब जब वह बच्चों की जिम्मेदारी पहले से निभा रहा हो। साथ ही अपने वायदों को पूरा कर रहा हो।
सुप्रीम कोर्ट ने एक व्यक्ति की बांबे हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार कर ली है, जिसमें उसकी पूर्व पत्नी को एक वर्ष के लिए दो बच्चों की कस्टडी दे दी गई थी।
दोनों पेशे से डॉक्टर हैं। उनकी शादी 7 मई, 2004 को हुई थी। दो बच्चों के जन्म के बाद दोनों के बीच मनमुटाव होने लगा। दिसंबर, 2016 में दोनों ने सहमति से तलाक ले लिया। तलाक के वक्त दोनों सहमत थे कि वे दूसरी शादी कर सकते हैं और बच्चे पिता के पास रहेंगे। यह भी करार हुआ कि पत्नी बेटी की शिक्षा, चिकित्सा और शादी का खर्च वहन करेगी। जब उस व्यक्ति ने पूर्व पत्नी से बेटी के खर्च की मांग की तो पूर्व पत्नी ने देने से इनकार कर दिया। इसी दौरान उस व्यक्ति ने दूसरी शादी कर ली।
वहीं, पूर्व पत्नी की याचिका पर बांबे हाईकोर्ट ने एक वर्ष के लिए बच्चों की कस्टडी मां को सौंप दी। इसके बाद उस व्यक्ति ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि तलाक के वक्त दोनों बच्चों की कस्टडी पिता को मिलने पर दोनों पक्ष सहमत थे। यह सहमति बिना किसी दबाव के थी। ऐसे में बच्चों की कस्टडी पिता के पास ही होनी चाहिए।