जंगलों में हर साल आग लगने से पर्यावरण और प्राकृतिक संपदा को होने वाले नुकसान से अब भारत में बना ड्रोन निपटेगा। मोदी सरकार की ‘मेक इन इंडिया योजना’ के तहत बना ड्रोन स्वचलित है। ड्रोन स्वत: ही आग कहां लगी है, यह भी पता लगाने में सक्षम है। हिमाचल प्रदेश में इसका ट्रायल शुरू हो गया है। जबकि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, केरल समेत कई राज्य इस तकनीक को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
40 मीटर ऊंचाई तक उड़ान भरने में सक्षम
फायर फाइटिंग ड्रोन (एफएफडी) का प्रयोग अमेरिका, इंग्लैंड, जापान और चीन समेत कई देशों में पिछले कई साल से हो रहा है। देश में यह पहला मौका है जब इसे प्रयोग में लाया जाने वाला है। एफएफडी 30 से 40 मीटर ऊंचाई तक उड़ान भरता है। खास बात यह है कि ड्रोन आग लगने की जगह की खुद पहचान करता और उसे बुझाने का काम करता है। इसमें एक सिलेंडर लगा रहता है जो निर्धारित क्षेत्र में केमिकल बरसाकर आग को पूरी तरह से बुझा देता है। निर्धारित 300 स्क्वायर फीट तक क्षेत्र में लगी आग के लिए एक एफएफडी काफी है, जबकि आग का दायरा बढ़ने के साथ ही ड्रोन की संख्या भी बढ़ानी पड़ती।
केंद्र ने हाल में दी है ड्रोन उड़ाने की इजाजत
दक्षिण भारत की श्री साई एयरोटेक इनोवेशन देश में इस ड्रोन को बनाने वाली इकलौती कंपनी है। यह एक स्टार्ट-अप है जिसे जुप्पा नाम से भी जाना जाता है। कंपनी के निदेशक वेंकलेश साई के मुताबिक, ड्रोन के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार करार करने जा रही है। मंडी जिले में शुरू ट्रायल के बाद हिमाचल में इसका इस्तेमाल हो सकेगा। साई ने बताया कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा समेत कई राज्यों ने इस तकनीक के प्रयोग के लिए सकारात्मक रुख अपनाया है। केंद्र सरकार ने हाल ही में देश में ड्रोन उड़ाने की मंजूरी प्रदान की है।