15 अगस्त पर लाल किले की प्राचीर प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम अपने भाषण में बलूचिस्तान के मुद्दे को उठाया था। उसके कुछ समय बाद ही भारत में रह रहे बलूच शरणार्थि से जुड़ा एक मामला समाने आया है।
कुछ महीने पहले जब मजदक दिलशाह बलूच दिल्ली एयरपोर्ट पर पहंचे तो एयरपोर्ट के सुरक्षा अधिकारियों को उन पर संदेह हुआ। अधिकारियों ने उन्हें रोककर उनसे पूछताछ की उनके पास उनका पासपोर्ट था।
जिस पर जन्म स्थान वाले कॉलम में पाकिस्तान के क्वेटा का पता लिखा हुआ था। बता दे कि मजदक दिलशाह बलूच भारत में रह रहे बलूच शरणार्थियों में से एक है।
एयरपोर्ट के सुरक्षा अधिकारी ने मजदक से पूछा कि क्या आप पाकिस्तानी है तो उन्होंने साफ इंकार कर दिया और वह वहां मौजूद अधिकारियों से कहने लगें कि 'मैं बलूच हूं पाकिस्तानी नहीं' उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आप मुझे कुत्ता कह ले पर पाकिस्तानी न कहें।
मैं मानता हुं कि मेरा जन्म स्थान पाकिस्तान में है पर मैं पाकिस्तानी नहीं हूं मुझे अपने इस जन्म स्थान की वजह से मुझे हमेशा से कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मजदक ने कहा कि मेरी कहानी भी उन हजारों बलूच शरणार्थियो जैसी ही है जिन्हें पाकिस्तानी शोषण का शिकार हो कर मजबूरन अपना धर छोड़ना पड़ा।
उन्होंने बताया की मैं और मेरी पत्नी बलूचों की आजादी के लिए ही भारत में आए हुए हैं। हमारा मकसद बलूचों को आजादी के आंदोलन की जानकारी प्रदान कर उनकी आजादी के लिए रुप रेखा तैयार करना है जिससे उन्हें जल्द से जल्द पाकिस्तान के शोषण से मुक्त कराया जा सके।