पश्चिम बंगाल के संदेशखाली की घटना का खुलासा होते ही तमाम विपक्षी दल ममता सरकार के खिलाफ लामबंद हो गए हैं। नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने आज संदेशखाली का दौरा किया। उन्होंने महिलाओं, स्थानीय लोगों से बातचीत की। इस बीच, कलकत्ता हाईकोर्ट ने संदेखाली मामले के मुख्य आरोपी शाहजहां शेख की अब तक गिरफ्तारी न होने पर हैरानी जताई है। कोर्ट ने कहा कि हमें नहीं पता कि आरोपी की सुरक्षा की जा रही है या नहीं, लेकिन ये आश्चर्य की बात है कि अब तक पश्चिम बंगाल की पुलिस आरोपी को गिरफ्तार ही नहीं कर पाई है।
मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सोमवार को एकल पीठ के आदेश में हस्तक्षेप करने से भी इनकार कर दिया, जिसमें भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी और पार्टी के एक अन्य विधायक शंकर घोष को संदेशखाली गांव का दौरा करने की अनुमति दी गई थी। सुवेंदु अधिकारी को पहले दिन में पुलिस ने क्षेत्र में निषेधाज्ञा का हवाला देते हुए रोक दिया था।
आश्चर्य की बात मुख्य आरोपी अभी भी गिरफ्त से बाहर- कोर्ट
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अगर एक व्यक्ति पूरी आबादी को बंधक बना सकता है तो ऐसे व्यक्ति को सरकार द्वारा प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए। यह टिप्पणी राज्य सरकार द्वारा एकल पीठ के आदेश को चुनौती देने वाली एक अपील की सुनवाई के दौरान की गई थी, जिसमें प्रशासन द्वारा संदेशखाली के कुछ क्षेत्रों में धारा 144 लगाने पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई थी। सुंदरबन की सीमा पर कोलकाता से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित नदी संदेशखाली क्षेत्र में सत्तारूढ़ टीएमसी के कुछ नेताओं पर दुष्कर्म और जमीन हड़पने के आरोपों को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहा है। अदालत ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि जिस व्यक्ति को इस समस्या का मूल कारण बताया जा रहा है, उसे अभी भी पकड़ा नहीं जा सका है।
आरोपी ने जनता को नुकसान पहुंचाया- कोर्ट
संदेशखाली मामले पर सख्त टिप्पणी करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि इसका मतलब यह हो सकता है कि या तो राज्य पुलिस अभी तक पकड़ नहीं पाई या आरोपी राज्य पुलिस के अधिकार क्षे्त्र से ही बाहर हो। पीठ ने कहा कि यह दिखाने के लिए पर्याप्त सामग्री है कि शाहजहां ने उत्तर 24 परगना जिला परिषद में एक निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में अच्छा करने के बजाए जनता को नुकसान पहुंचाया है। खंडपीठ ने कहा कि न्यायमूर्ति अपूर्ब सिन्हा रॉय की एकल पीठ ने 12 फरवरी को बंदूक की नोक पर यौन उत्पीड़न और आदिवासी भूमि को जबरन छीनने के आरोपों पर स्वत: संज्ञान लिया था। पीठ ने कहा कि कि अगर शाहजहां शेख भागता रहा तो जाहिर तौर पर कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो जायेगी, क्योंकि उसके पास उसके समर्थक हैं।